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congress rahul gandhi talks with prof ashish jha about covid19 vaccine pragnt

जब राहुल गांधी ने हार्वर्ड प्रोफेसर से पूछा- भैया, ये बताइए वैक्सीन कब आएगी ?

  • Updated on 5/27/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) अपना कहर बरपा रहा है। भारत में अब तक 1 लाख 45 हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि इस खतरनाक वायरस की दवा कब तक आएगी। कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भी इस बात की इच्छुकता दिखाई।

हेल्थ एक्सपर्ट के साथ कोरोना पर चर्चा
दरअसल, कोरोना वायरस संकट को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार सरकार पर सवाल दाग रहे हैं। इस क्रम में राहुल गांधी ने आज हार्वर्ड में स्वास्थ्य विशेषज्ञ आशीष झा (Prof Ashish Jha) और प्रोफेसर जोहान (Prof. Johan Giesecke) से बातचीत की।

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भैया, ये बताइए वैक्सीन कब आएगी?- राहुल
इस दौरान गांधी ने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट प्रो. आशीष झा से बातचीत में पूछा कि ' भईया, ये बताइए कि वैक्सीन कब आएगी?' इस पर प्रो. झा ने जवाब दिया कि मुझे पूरा भरोसा है कि ये अगले साल तक आ जाएगी। उन्होंने कहा कि दो-तीन वैक्सीन हैं जो काम कर सकती हैं। इसमें एक अमेरिका की है, एक चीन की है, एक ऑक्सफॉर्ड की है। तीनों दावा कर रहे हैं। लेकिन कहा नहीं जा सकता कि कौन सा सही साबित होगा। हो सकता है तीनों काम न करें हो सकता हैं तीनों काम कर जाएं। मुझे विश्वास है कि कोरोना वैक्सीन अगले साल तक कहीं न कहीं से अगले साल तक आ जाएगी।'

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कोरोना संकट पर राहुल गांधी की चर्चा
दुनिया के दो जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों आशीष झा और जोहान गिसेक ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस अगले साल तक रहने वाला है और भारत (India) में लॉकडाउन (Lockdown) में लचीलापन लाने और आर्थिक गतिविधियां आरंभ करते समय लोगों के बीच विश्वास पैदा करने की जरूरत है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद के दौरान दोनों विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि कोरोना के संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए बड़े पैमाने पर जांच की जाए और बुजुर्गों, गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों और अस्पतालों में मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

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9/11 अगर नया अध्याय तो कोरोना नई किताब
दोनों विशेषज्ञों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि अब लोगों का जीवन बदलने वाला है। अमेरिका (America) में 11 सितंबर, 2001 के आतंकी हमले (9/11) को नया अध्याय कहा जाता है, लेकिन कोविड-19 पूरी नयी किताब होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत में कोरोना से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्यों को ज्यादा अधिकार एवं संसाधन मुहैया कराने होंगे।

अगले साल तक रहेगा कोरोना
भारतीय मूल के जाने माने अमेरिकी लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आशीष झा ने कहा कि कोरोना वायरस अगले साल तक रहने वाला है और लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियां आरंभ करते समय लोगों के बीच विश्वास पैदा करने की जरूरत है।

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भारत को रणनीति बनाने की जरूरत
'ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' के नवनियुक्त डीन झा ने यह भी कहा कि भारत को लॉकडाउन और कोरोना जांच को लेकर रणनीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव के साथ ही इसका मनोवैज्ञानिक असर भी है और सरकारों को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। 'हारवर्ड ग्लोब्ल हेल्थ इंस्टीट्यूट' के निदेशक झा ने कहा, 'इस वायरस का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी है। लॉकडाउन के जरिए आप अपने लोगों को एक तरह का संदेश देते है कि स्थिति गंभीर है। ऐसे में जब आप आर्थिक गतिविधियां खोलते हैं तो आपको लोगों में विश्वास पैदा करना होता है।'

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अगले साल तक आएगी दवा
उनके मुताबिक यह वायरस अगले 18 महीने यानी 2021 तक रहने वाली समस्या है। अगले साल ही कोई टीका या दवा आएगी। लोगों को समझने की जरूरत है कि अब जीवन बदलने वाला है। अब जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। लॉकडाउन से जुड़े राहुल गांधी के एक सवाल के जवाब में झा ने कहा कि सरकारों को रणनीति बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अच्छी बात यह है कि उसके पास बड़ी संख्या में नौजवान आबादी है जिसके लिए कोरोना घातक नहीं होगा। बुजुर्गों और अस्पतालों में भर्ती लोगों का ख्याल रखना होगा।

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'भारत में सख्त लॉकडाउन अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा'
स्वीडन के 'कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट' के प्रोफेसर एमिरेटस जोहान गिसेक ने भी इस वायरस के अगले कई महीनों तक मौजूद रहने का अंदेशा जताया, हालांकि यह भी कहा कि यह एक 'मामूली बीमारी' है जो 99 फीसदी लोगों के लिए घातक नहीं है। भारत में लॉकडाउन से जुड़े सवाल पर गिसेक ने कहा, 'भारत में सख्त लॉकडाउन अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा। लॉकडाउन में लचीलेपन की जरूरत है।' उनके मुताबिक लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलना चाहिए। पहले कुछ पाबंदियां हटाई जाए। अगर संक्रमण ज्यादा फैलता है तो फिर एक कदम पीछे खींचे लीजिए। बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों का ध्यान रखा जाए।

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