Monday, Sep 20, 2021
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कांग्रेस ने राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला

  • Updated on 7/28/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा विवादित आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाए जाने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि अस्थाना को नियमों की अनदेखी करके नियुक्त किया गया है। खेड़ा ने कहा कि अस्थाना पीएम मोदी के चहेते अफसर रहे हैं, इसलिए उन्हें यह पद दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता की ओर से कहा गया कि अस्थाना के रिटायरमेंट के सिर्फ 4 दिन बाकी थे, फिर भी उनको नई पोस्टिंग दी गई। बता दें कि अस्थाना ने दिल्ली पुलिस आयुक्त का कार्यभार संभाल लिया है।

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खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा, 'पहले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर सर्विस के 6 महीने से कम का वक्त बचा है तो फिर DGP स्तर की कोई नियुक्ति नहीं होगी।' खेड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्र ने सभी मानदंडों को दरकिनार कर अस्थाना को यह पोस्ट दी है। खेड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि यह फैसला जनहित में लिया गया है, तो सरकार को इसके पीछे की वजह बतानी चाहिए। वह बोले, 'हम जानना चाहते हैं कि ऐसी क्या जरुरत थी, ऐसा क्या डर था।'

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कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की नियुक्ति गैर क़ानूनी है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट एक निर्णय में प्रकाश सिंह / भारत सरकार में कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि ऐसी नियुक्ति के लिए 6 माह का कार्यकाल होना जरुरी है।

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बता दें कि अस्थाना भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के गुजरात कैडर के अधिकारी हैं। वह फिलहाल सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे। अस्थाना की नियुक्ति 31 जुलाई को उनकी रिटायरमेंट से 3 दिन पहले हुई है। उनका कार्यकाल एक साल का होगा। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी अस्थाना पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में स्पेशल डायरेक्टर रह चुके हैं।

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बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी अपने ट्वीट में अस्थाना की नियुक्ति पर हैरानी जताई है। भूषण कहते हैं, 'राकेश अस्थाना की नियुक्ति अवैध है। सीबीआई चीफ की नियुक्ति के दौरान भी सीजेआई ने यह कारण उजागर किए थे। उनके पास सेवानिवृति के लिए 6 महीने भी नहीं बचे थे। क्या पुलिस कमिशनर के लिए दो साल मिलेंगे।'

 

 

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