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congress says interest deduction of government wrong step

कांग्रेस का सरकार पर निशाना, कहा- ब्याज कटौती सरकार का अमानवीय कदम

  • Updated on 4/1/2020

नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। कोरोना वायरस (Corona virus) के संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान छोटी बचत योजनाओं के ब्याज दर में की गई कटौती को कांग्रेस ने सरकार का अमानवीय कदम बताया है। पार्टी का कहना है कि यह वक्त जब लोगों को ज्यादा से ज्यादा राहत देने का है, तो सरकार इस तरह की कटौतियां कर मुश्किलें बढ़ा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने बुधवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस (Press conference) में कहा कि किसान, महिलाएं, पेंशनर, मध्यमवर्ग, निम्न आय वर्ग अपनी छोटी-छोटी बचत करके विभिन्न बचत योजनाओं में रखता है। सरकार के फैसले से लोगों की दिक्कतें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि यह जेबों को लूटने का वक्त नहीं, कीमतों में छूट देने का था, लेकिन सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया।

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ब्याज कटौती से सीधा नुकसान होगा
उन्होंने बताया कि 2014 की नेशनल सेविंग इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार छोटी बचत योजनाओं में 28 करोड़ खाताधारक थे। अगर, 10 प्रतिशत हर साल भी इन आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई हो तो वर्ष 2020 में छोटी बचत योजनाओं के डिपोजिटर्स की संख्या 30 करोड़ होनी चाहिए। जिनमें हर परिवार पर अगर 3-3 लोग भी हों तो यह संख्या 90 करोड़ हो जाती है। इन खातों में लोगों की गाढ़ी कमाई का 14 लाख करोड़ रुपए जमा है। ब्याज कटौती के फैसले से सीधा-सीधा 19 हजार करोड़ सालाना का नुकसान है।

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एसीबीआई ने सेविंग घटा कर इतना कर दिया
उन्होंने कहा कि इससे पहले मार्च में एसबीआई ने सेविंग ब्याज 3.25 से घटा कर 3.0 प्रतिशत कर दिया था, जिससे 34 करोड़ 50 लाख खाताधारकों को 2800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसी तरह फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज में कटौती हुई जिससे 7000 करोड़ रुपये का नुकसान खाताधारकों को हुआ।

उन्होंने ईएमआई को निलंबित करने की बजाए अगले तीन महीने की कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा कि लोगों की नौकरी खतरे में है और बेरोजगारी चरम पर है। ऐसे में लॉकडाउन होने के बाद स्थिति सामान्य होने पर भी लोग ईएमआई भरने की स्थिति में नहीं रहेंगे। सरकार को चाहिए कि बैंकों के ऋणों की ईएमआई निलंबित करने की बजाए उसे माफ करे।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

 

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