Monday, Jun 27, 2022
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कांग्रेस, TMC और स्टालिन ने अमित शाह पर बोला हमला, लगाया हिंदी थोपने का आरोप

  • Updated on 4/8/2022

 

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हिंदी पर जोर भारत की ‘अखंडता और बहुलवाद’ के खिलाफ है और यह अभियान सफल नहीं होगा। शाह द्वारा सात अप्रैल को दिये गये उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कि हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि स्थानीय भाषाओं के लिए, स्टालिन ने कहा कि यह विचार देश की अखंडता को बर्बाद कर देगा। शाह ने बृहस्पतिवार को कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं के नहीं, बल्कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। 

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केन्द्रीय गृह मंत्री ने संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और यह निश्चित तौर पर हिंदी के महत्व को बढ़ाएगा। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अध्यक्ष स्टालिन ने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि भारत के बहुलवाद को नुकसान पहुंचाने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेता लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘क्या अमित शाह यह सोचते हैं कि ‘हिंदी राज्य’ काफी है और भारतीय राज्यों की जरूरत नहीं है?‘‘ मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘आप बार-बार वही गलती कर रहे हैं। हालांकि, आप सफल नहीं होंगे।’’ 

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हिंदी थोपने के प्रयास का विरोध किया जाएगा: तृणमूल
तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि गैर हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। इससे एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि राजभाषा हिंदी को देश की एकता का एक महत्वपूर्ण अंग बनाने का समय आ गया है। शाह ने यह भी कहा था कि कैबिनेट का 70 प्रतिशत एजेंडा हिंदी में तैयार होता है और हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर अपनाया जाना चाहिए न कि स्थानीय भाषाओं के स्थान पर। 

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 तृणमूल ने कहा कि हिंदी देश की राष्ट्रीय भाषा नहीं है। पार्टी ने कहा कि शाह का एक राष्ट्र, एक भाषा, एक धर्म’’ का एजेंडा कभी पूरा नहीं होगा। तृणमूल के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कहा,’’अगर अमित शाह और भाजपा ने गैर हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने का प्रयास किया तो इसका विरोध किया जाएगा। इस देश के लोग, जहां इतनी विविधता है, इस प्रकार की चीज को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’’ रॉय ने कहा, 'भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी कहा था कि हिंदी को गैर हिंदी भाषी राज्यों पर थोपा नहीं जाएगा जब तक कि वे इसे स्वीकार नहीं करते।’’  

कांग्रेस ने शाह पर हिंदी थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया 
कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह पर हिंदी थोपने की कोशिश करने का शुक्रवार को आरोप लगाया और कहा कि ऐसा करके वह इस भाषा का नुकसान कर रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने यह भी कहा कि शाह महंगाई और अन्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि हिंदी  ‘राजभाषा’ है, न कि ‘राष्ट्रभाषा’, जैसा कि राजनाथ सिंह ने संसद में तब कहा था, जब वह गृह मंत्री थे। रमेश ने ट्विटर पर कहा, ‘‘मैं हिंदी के साथ बहुत सहज हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि इसे किसी पर थोपा जाये। अमित शाह इसे थोपकर हिंदी का नुकसान कर रहे हैं।’’ कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि गृह मंत्री ने हिंदी के बारे में उपदेश देने की कोशिश की है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए। 

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उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘गृह मंत्री ने हमें हिंदी के बारे में उपदेश देने की कोशिश की है। मैं पहले ही हिन्दी में उत्तर दे चुका हूं। मैं हिंदी का बहुत बड़ा समर्थक हूं, लेकिन थोपने का नहीं, भड़काऊ राजनीति का नहीं, विभाजनकारी राजनीति का नहीं।’’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंदी का मुद्दा उठाकर गृह मंत्री महंगाई के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपका हिंदी उपदेश महंगाई या बेरोजगारी का समाधान करेगा- नहीं। आपका उद्देश्य चीजों को थोपकर, जबरदस्ती करके आपसी अविश्वास पैदा करना है।’’ सिंघवी ने केन्द्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत ने एलपीजी की कीमतों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ‘‘नंबर एक का दर्जा’’ हासिल किया है, दुनिया में पेट्रोल के मामले में तीसरा स्थान और डीजल के मामले में आठवें स्थान पर है।’’ 

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