Sunday, Jun 13, 2021
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Constant defeat in BJP due to defeat in successive states party introspection

लगातार राज्यों में पराजय से बीजेपी में दौड़ा करंट, पार्टी करें आत्ममंथन

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/कुमारआलोक भास्कर। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में जीत कोई आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल और चतुराई का ऐसा घालमेल किया जिससे बीजेपी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दों से भटकती रही। जिसका फायदा उठाने में केजरीवाल  कामयाब हुए। बीजेपी (BJP) की यह हार लोकसभा चुनाव के बाद महज 9 महीनों में ही लगातार 2 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में हुई है। हालांकि पार्टी किसी तरह हरियाणा में सरकार बनाने में कायमाब हो गई लेकिन लचर प्रदर्शन जारी रहा।

Narendra modi and amit sah in party office

केजरीवाल के करिश्मे के सामने नहीं चला मोदी-शाह का जादू  

मोदी-शाह की लोकप्रियता से जोड़ना सही नहीं
क्या मोदी-शाह की लोकप्रियता में कमी के कारण पार्टी एक के बाद एक राज्य हारती जा रही है, या राज्यों की राजनीति तेजी से बदलती जा रही है, जिसे पार्टी के शीर्ष नेताओं ने समय रहते समझने की कोशिश नहीं की है। अब वो गुजरा समय हो गया जब केंद्र की सत्ता में रही पार्टी दशकों तक राज्य की राजनीति को प्रभावित करती रही। जैसा कि कांग्रेस के साथ होता रहा। लेकिन अब मतदाता परिपक्व हो चुका है। उसे किसी भी तरह से बरगलाया नहीं जा सकता है। 

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राष्ट्रीय मुद्दों को भुनाने की कोशिश में बीजेपी की हुई हार
जब हम बीजेपी की हार का विश्लेषण करते है तो दो कदम पीछे जाकर समझना होगा। जिससे साफ हो जाएगा कि पार्टी कहां और कब गलतियां की है। बीजेपी जब महाराष्ट्र चुनाव के लिये उतरी तो लोकसभा चुनाव में मिले प्रचंड जीत के बाद पहली विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही थी। जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हट चुका था। पाकिस्तान की बौखलाहट वैश्विक मंच पर जगजाहिर हो चुका था। जबकि भारत एक मोदी के नेतृत्व में नए युग में प्रवेश कर रहा था। 

Manoj tiwari and gautam gambhir in a meeting

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महाराष्ट्र में बीजेपी का प्रदर्शन रहा संतोषजनक
जब ऐसे अनुकुल माहौल में महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के लिये पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे तो कश्मीर कार्ड के सहारे ही राजनीतिक नैया पार करने में जुट गए। वैसे चुनाव परिणाम बीजेपी के लिये संतोषजनक रहा। कारण पार्टी ने शिवसेना से गठबंधन रहते जितनी सीटों पर लड़ा उसे अधिकतर सीटों पर जीत हासिल हुई। यह अलग बात है कि शिवसेना से खटपट के कारण बीजेपी सरकार नहीं बना सकी। हालांकि अक्टूबर में महाराष्ट्र,हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पूरी तरह स्थानीय मुद्दो के बजाए राष्ट्रीय विषयों को उछालकर सरकार वापसी का सपना देखा। जिससे पार्टी को तगड़ा झटका लगा।

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राज्यों के चुनाव में बीजेपी सरकार को पेश करनी चाहिये रिपोर्ट कार्ड
यह साफ है कि पार्टी को कश्मीर कार्ड और पाकिस्तान को विधानसभा चुनाव में घसीटने के बजाए महाराष्ट्र,हरियाणा में अपने सरकार के रिपोर्ट कार्ड को जनता के सामने पेश करनी चाहिये थी। लेकिन फिर पार्टी ने सबक नहीं लिया और झारखंड चुनाव में भी वहीं गलतियां दोहराने लगी। रघुवर सरकार के उपलब्धियों को गिनाने के बजाए मोदी-शाह ने धारा 370 हटाने और CAA तथा NRC का मुद्दा जमकर उछाला। पीएम मोदी ने झारखंड चुनाव के दौरान ही CAA को लेकर विवादित बयान दिया था कि सड़क पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को कपड़ो से ही पहचाना जा सकता है। जिसका सीधा-सीधा अर्थ एक धर्म विशेष को टारगेट करने का मतलब समझा गया।

Narendra modi,amit sah and jp nadda in party office
             
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केजरीवाल के काम पर पड़ा वोट
फिर झारखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम आया तो बीजेपी को एक ओर राज्य से हटना पड़ा। लेकिन जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के Result आए तो पार्टी की जमीन ही खिसक गई। वो भी जब दिल्ली की जमीन और कानून व्यवस्था पर सीधे-सीधे मोदी सरकार काबिज है। मतलब जमीन बीजेपी की लेकिन उस पर बहुमंजिली इमारत खड़ा करने का काम अरविंद केजरीवाल ने किया है। फिर से पार्टी वहीं CAA को लेकर शाहीन बाग पर अटैक करना शुरु किया। दिल्ली की जनता बीजेपी के बातों में आने के बजाए केजरीवाल के काम पर विश्वास किया। पार्टी को निश्चित रुप से आत्ममंथन की आवश्यकता है। 

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