Sunday, Jan 19, 2020
consumers are overwhelmed by the excess electricity bill

अधिक राशि के बिजली बिलों से उपभोक्ता हैं बेहद परेशान

  • Updated on 7/23/2019

हमारे सरकारी विभाग समय-समय पर ऐसे ‘कारनामे’ करते रहते हैं जिनसे आम आदमी (Comman Man) को भारी परेशानी होती है। इसी कड़ी में विभिन्न राज्यों के बिजली विभागों द्वारा उपभोक्ताओं को बिजली की वास्तविक खपत से कहीं अधिक राशि के बिल भेज कर परेशान किया जा रहा है : 

 

  • 30 मई को मध्य प्रदेश में नागौर के एक बिजली उपभोक्ता को 2,72,701.00 रुपए का बिजली बिल भेजा गया जबकि पिछला बिल मात्र 289 रुपए 
  • का आया था।
  • 25 जून को गुडग़ांव में एक उपभोक्ता को मई महीने में 70,25,375.00 रुपए का बिल भेज दिया गया।
  • 16 जुलाई को बिहार के बॢबघा में एक गरीब आदमी को जो एक झोंपड़ी में सिर्फ एक बल्ब और एक पंखे का ही इस्तेमाल करता है, 7.5 लाख रुपए का बिजली बिल भेज दिया गया। 
  • 17 जुलाई को मध्य प्रदेश में सागर ग्रामीण डिवीजन के अंतर्गत आने वाले ढाणा गांव में एक उपभोक्ता को मात्र एक मास में 10,207 यूनिट बिजली की खपत दिखाते हुए 88,872.00 रुपए का बिल थमा दिया गया जबकि उसका पिछला बिल मात्र 50 यूनिट बिजली खपत का आया था।
  • 19 जुलाई को ङ्क्षभड जिले के अकलौनी गांव वासियों को 4-4 महीने का बिजली खपत का बिल भेज दिया गया जबकि अभी तो आधे गांव में बिजली के मीटर भी नहीं लगे हैं और न ही कनैक्शन दिए गए हैं।

और अब इसी महीने उत्तर प्रदेश में हापुड़ के चामरी गांव में एक बुजुर्ग ग्रामीण उपभोक्ता शमीम अहमद को बिजली विभाग ने 128,45,95,444.00 रुपए का बिजली बिल भेज दिया और अदायगी न होने पर उसका कनैक्शन भी काट दिया है।

शमीम अहमद के अनुसार कनैक्शन कटने पर जब उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि पहले बकाया बिल का भुगतान करो तभी कनैक्शन जुड़ेगा। शमीम अहमद का आरोप है कि कोई उसकी बात ही नहीं सुन रहा।

अनाप-शनाप राशि के बिजली बिलों के पीछे कम्प्यूटर आप्रेटरों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है जो बिलों की पंचिंग करते हुए गलत राशि भर कर उपभोक्ताओं की परेशानी का कारण बन रहे हैं।

चूंकि बिजली कम्पनी अपने अधिकारियों से मीटर रीडिंग की क्रास वैरीफिकेशन करवाती है अत: उपभोक्ताओं को गलत बिल थमाने के लिए बिजली विभाग और इसके संबंधित अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं जिसके लिए उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि उपभोक्ता गलत राशि के बिल मिलने से होने वाली परेशानी से बच सकें।                                                                                                                                                                           —विजय कुमार 

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