Friday, Jul 01, 2022
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नर्सों के वेतन संबंधी आदेश नहीं मानने पर अवमानना कार्यवाही का सामना करना होगा: कोर्ट 

  • Updated on 5/24/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सों के वेतन और काम करने की स्थिति के संबंध में अदालत के पूर्व के आदेश को लागू करने के लिए कहा है। अदालत ने आगाह किया है कि आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में पेश होकर बताना पड़ेगा कि अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने खंडपीठ के आदेश का पालन नहीं करने के लिए ‘इंडियन प्रोफेशनल नर्सेस’ की अवमानना याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार का मौजूदा रुख नहीं स्वीकार किया जा सकता कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें ‘लागू करने योग्य नहीं’ हैं क्योंकि एक अन्य मामले में सरकार ने एकल न्यायाधीश के समक्ष इसका बचाव किया था। 

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अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील को निर्देश लेने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अदालत ने कहा कि सिफारिशों को मानने के लिए 25 जून 2018 के दिल्ली सरकार के आदेश के मद्देनजर खंडपीठ ने जुलाई 2019 में उसे लागू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा, ‘‘अपेक्षा है कि दिल्ली सरकार अगली सुनवाई से पहले 22 जुलाई 2019 के आदेश का पालन करेगी। अगर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में पेश होकर बताना होगा कि अदालत अवमानना कानून, 1971 की धारा 12 के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।’’ 

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अदालत ने कहा, ‘‘विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें स्वीकार करने और एकल न्यायाधीश के समक्ष 25 जून 2018 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) के आदेश का बचाव करने के मद्देनजर इस चरण में यह अदालत दिल्ली सरकार के रुख में बदलाव को स्वीकार नहीं करेगी। सरकार अब अपने रुख से पीछे हट रही है, इसे ठीक नहीं कहा जा सकता।’’ 

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उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति ने 50 बिस्तरों से कम वाले अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों के लिए न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये की सिफारिश की थी। समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि उनकी काम करने की स्थिति, जैसे छुट्टी, काम के घंटे, चिकित्सा सुविधाएं, परिवहन और आवास, सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों के बराबर होनी चाहिए। अवमानना की कार्यवाही में, दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस समय, सरकार के लिए निजी अस्पतालों और र्निसंग होम को उक्त विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के अनुसार वेतनमान लागू करने के लिए मजबूर करना आॢथक रूप से व्यवहार्य नहीं है। 

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अदालत ने कहा कि यदि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को दिल्ली सरकार द्वारा आॢथक रूप से व्यवहार्य नहीं पाया जाता है, तो उसे स्पष्टीकरण के लिए खंडपीठ के पास जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा सिफारिशों को स्वीकार करने और उसका बचाव करते हुए एक आदेश पारित करने के बाद अब वह अपने आदेश से मुकर नहीं सकती और ऐसा नहीं कह सकती कि इसे लागू नहीं किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।     

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