Friday, Dec 03, 2021
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कोरोना संकट में मोदी सरकार के लिए फायदेमंद हो सकते हैं राहुल, रघुराम के ये 7 सुझाव

  • Updated on 4/30/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश से फरार मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या समेत 50 बैंक डिफॉल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपये माफ करने के खुलासे के बाद देश की सियासत तेज हो गई है। विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार को जहां आड़े हाथ लिया है, वहीं आरबीआई को भी सतर्क रहने और जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है। 

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वहीं, कांग्रेस की ओर से  केंद्र सरकार पर हमले तेज हो गए हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का इंटरव्यू लेकर कई मुद्दों को उठा दिया है। इस खास बातचीत में कई बातें हैं, जो केंद्र की मोदी सरकार चाहे तो इस्तेमाल कर सकती है। आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने में मदद मिल सकती है। एक नजर ऐसे ही कुछ खास बिंदुओं पर : -

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1- राहुल गांधी के साथ बातचीत में रघु राम राजन ने कहा कि भारत एक गरीब देश है और संसाधन भी बेहद सीमित हैं। ऐसे में लोगों को लंबे समय तक घर बैठाकर नहीं खिलाया जा सकता। लॉकडाउन लंबे समय तक रखना देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा। इसलिए कुछ ऐतिहातों के साथ आर्थिक गतिविधियां शुरू करनी होंगी, ताकि लोग अपनी रोजी-रोजगार में लौट सकें।

2- राहुल गांधी ने कोविड-19 के बीच देश की अर्थव्यवस्था को उबारने को लेकर सवाल किया तो इसके जवाब में राजन ने कहा कि जैसे-जैसे हम संक्रमण का कर्व (वक्र) मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं में भीड़ बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, हमें लोगों की आजीविका फिर से शुरू करने के बारे में सोचना शुरू करना होगा। 

3- राजन ने यह भी कहा कि भारत जो भी कदम उठाएगा, उसके लिए बजट की एक सीमित है। किसानों, प्रवासी श्रमिकों की समस्या पर राजन ने कहा कि यही वह क्षेत्र है, जहां हमें प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का फायदा उठाना चाहिए। संकट में पड़े किसानों और मजदूरों की मदद के लिए इसका उपयोग किया जाना चाहिए।

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4- राहुल ने कहा कि देश के गरीबों की मदद के लिए कितनी राशि की जरूरत होगी तो राजन ने कहा कि 65 हजार करोड़ रुपये में इस वर्ग को संकट से बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की जीडीपी 200 लाख करोड़ की है, जिसमें से 65 हजार करोड़ रुपये कोई बड़ा खर्च नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर गरीबों की जान बचाने के लिए हमें इतनी राशि खर्च करनी पड़े तो करना चाहिए।

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5- लॉकडाउन बढ़ाने से जुड़े राहुल के सवाल पर राजन ने कहा कि लॉकडाउन के दूसरे चरण का मतलब है कि पहला चरण पूरी तरह सफल नहीं रहा, जिसके चलते आर्थिक गतिविधियां खोली नहीं जा सकी। और अगर, लॉकडाउन का तीसरा चरण लागू करना पड़ा तो विश्वसनीयता पर आंच आएगी और आर्थिक गतिविधियां रोक कर रखना देश के लिए घातक होगा।। बेहतर यही है कि लॉकडाउन हटाने की शुरुआत करें और जहां भी केस दिखें, वहां आइसोलेट कर दें। 

6-राजन ने कहा कि भारत में मध्य वर्ग और निम्न वर्ग के लिए अच्छे रोजगार के अवसर सृजित करना बहुत जरुरी है। यह काम अर्थव्यवस्था में बहुत बड़े पैमाने पर विस्तार के साथ ही किया जा सकता है।  राजन ने कहा कि रोजगार के अच्छे अवसर निजी क्षेत्र में होने चाहिए, ताकि लोग सरकारी नौकरियों का मोह छोड़ें। इसी तरह एक मजबूत उद्योग बनेगा। उन्होंने कहा कि यह आउटसोर्सिंग क्षेत्र इसलिए पनप और बढ़ सका क्योंकि उसमें सरकार का दखल नहीं था। 

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7- राजन ने अमरीका की मिसाल देते हुए कहा कि वहां एक दिन में डेढ़ लाख तक टेस्ट हो रहे हैं लेकिन वहां विशेषज्ञों, खासतौर से संक्रमित रोगों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षमता को तीन गुना करने की जरूरत है यानी 5 लाख टेस्ट प्रतिदिन हों तभी आप अर्थव्यवस्था को खोलने के बारे में सोचें। कुछ तो 10 लाख तक टेस्ट करने की बात कर रहे हैं। जहां तक भारत की बात है तो आबादी को देखते हुए हमें इसके चार गुना टेस्ट करने चाहिए। 
 

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