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corona effect when the ambulance playing the siren came out not sick but not a corpse albsnt

Corona Effect: जब सायरन बजाती एंबुलेंस में बीमार नहीं, लाश नहीं बल्कि निकला...तो

  • Updated on 4/6/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। देश कोरोना वायरस (Corona Virus) से जूझ रहा है। इसके लिये सरकार ने पूरी ताकत झौंक दी है। फिर भी चंद रुपये के लिये नियमों की धज्जियां ही उड़ाई जाती है। तो इसे क्या कहेंगे- लापरवाही या फिर कुछ ओर? जी हां, हम और आप जब कभी-भी रोड पर सफर करते है तो अचानक से साइरन बजाती एंबुलेंस अक्सर दौड़ती नजर आती है तो देखा जाता है कि अन्य गाड़ियां उसे आगे जाने के लिये रास्ता छोड़ देती है।

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चंद रुपये के लिये लोगों के जान से होती है खिलवाड़

लेकिन जब समय गंभीर हो, सामने संकट हो तब कोई एंबुलेंस चमचमाती सड़कों पर स्पीड से सायरन बजाती भाग रही हो तभी अचानक जब उसकी चैकिंग होती है तो पता चलता है कि उसमें बैठे सभी स्वस्थ यात्री है। इन सबकों उनके गंतव्य शहर तक पहुंचाने की मुहिम ही चला रखी है। इसे हम सिस्टम की खामियां कहकर टाल नहीं सकते है। बल्कि यह हम और आप की सबसे बड़ी कमजोरी की ओर इंगित करती है।

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देश में 21 दिन के लिये लॉकडाउन है लागू

देश में 21 दिन के लिये लॉकडाउन लागू है। जिसका सबको पालन करना चाहिये। इसके लिये केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक एक अभियान चला रखा है। अक्सर एंबुलेंस को देखते ही पुलिस-प्रशासन भी टच करने की जुर्रत नहीं करती है। तो इसके पीछे वजह भी साफ है कि ऐसा लगता है कि ऐसे लोग जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा हो उसे अगर निकट के अस्पताल में पहुंचाया जाता है तो उसका समय जाया नहीं करना चाहिये। यह मानवता का धर्म भी कहता है।

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दिहाड़ी मजदूरों ने जब की पलायन

लेकिन इस सबके उलट एंबुलेंस का दुरुपयोग आजकल इस कोरोना वायरस का डर और लॉकडाउन के आगे भी जारी रहने की आशंका के बीच ऐसे हजारों लोग है जो जुगाड़ में जुटे रहते है। अभी कुछ ही दिन पहले की बात है कि जब लाखों की संख्या में दिहाड़ी मजदूरों ने बेबस पेट की भूख मिटाने के लिये और अपने-अपने शहर जाने के लिये आनंद विहार पहुंचे तो देश भर से उसे भला-बुरा सुनने को मिला। यह सच है कि इन लोगों ने लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी की थी।

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लेकिन पढ़े-लिखे तबका भी नियमों की उड़ाते हैं धज्जियां

लेकिन ऐसे पढ़े-लिखे लोगों को क्या कहा जाए जो मौटी रकम देकर हैल्थ केयर्स के साथ सांठ-गांठ करके अपने शहर चले जाते है। तो फिर रास्ते में प्रशासन भी मौन हो जाती है। ऐसे लोग एक राज्य से दूसरे राज्य तक की यात्रा करते है। उन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण का डर भी नहीं सताता है। काश कोरोना पैसे वालों की बात सुनता और मौटी रकम के बाद उसकी जिंदगी बख्श देती। लेकिन यह हो नहीं रहा है। क्या अमीर,क्या गरीब-सभी कोरोना वायरस के चपेट में रोज आ रहे है। तो इसके पीछे की वजह भी स्पष्ट है कि हम सभी नियमों को ताक पर रखकर चलना पसंद करते है तो खामियाजा भी हमें ही भुगतना पड़ेगा।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

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