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Exclusive Interview: कोरोना के खिलाफ दिल्ली सरकार की तैयारियों पर क्या बोले संजय सिंह ?

  • Updated on 6/15/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। मौतें भी अधिक हो रही हैं। दिल्ली के अस्पतालों का हाल क्या है और किस तरह की तैयारियां हैं, इन सभी मुद्दों पर आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सदस्य  संजय सिंह  ने नवोदय टाइम्स से खुलकर बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...

सवाल: राज्यसभा सांसद कोटे के प्लेन टिकटों से प्रवासियों को उनके घर भेजा, ये ख्याल कैसे आया? 
जवाब:
प्रवासी मजदूरों की समस्याओं से मन बहुत व्यथित हुआ, कई वीडियो सामने आए कि पैदल चलते हुए लोगों की जान चली गई। मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर एक मासूम बच्चे द्वारा मां के आंचल को खींचने के जो दृश्य सामने आए, उसने रात भर सोने नहीं दिया। ट्रेनें रास्ता भटक गईं और ये सब देखकर सोचा कि मैं कितने लोगों को उनके घर पहुंचा सकता हूं। मेरे साथी अजित त्यागी ने कहा कि 34 टिकट जो आपको हवाई यात्रा के लिए मिलते हैं क्यों न प्रवासियों को उनके घर भेजने के लिए इस्तेमाल करें। इन टिकटों पर लोगों को उनके घर भेजा फिर अन्य साथियों ने सहयोग किया और चार्टर विमान से 180 लोगों को बिहार वहीं 60 बसों को भी बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश भेजा। बहुत से विधायकों ने काम किया लेकिन दिलीप पांडे की सेवाएं अनुकरणीय हैं। उन्होंने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। बहुत से साथियों से प्रेरणा मिलती है। मेरी पत्नी ने भी मिलकर काम किया और यही मानवता, इंसानियत का धर्म है।
बड़ी बातें करें, बड़े आदर्श की बात करें और संकट में कुछ ना करें, ये खोखलापन है। 

सवाल: आपकी पत्नी अनिता सिंह भी बहुत सक्रिय रही हैं? 
जवाब: हां, याद होगा शुरुआती दिनों में मैं 14 दिन क्वारंटीन में रहा था और तभी से वह रसोई चला रही हैं और अभी भी बहुत सक्रिय हैं। 

सवाल: दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने जोर दिया कि प्रदेश में कोरोना के सामुदायिक प्रसार की स्थिति है, आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? 
जवाब: जब आप सामुदायिक प्रसार मानते हैं तो लडऩे के तरीके अलग होते हैं। इसी कारण हम बार-बार कह रहे हैं कि  संक्रमण सामुदायिक स्तर पर फैल चुका है, इसे मानना चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार, आईसीएमआर न जाने क्यों नहीं मान रहे हैं, मुझे नहीं मालूम। 

सवाल: दिल्ली के अस्पतालों की स्थिति, जिस पर विवाद होता रहा है।  क्या लॉकडाउन में व्यवस्था कम हो गई, केंद्र से सहयोग नहीं मिला या लोग इतने लापरवाह रहे कि उनकी वजह से संक्रमण बढ़ा? 
जवाब: जो आंकड़े सामने हैं उसे देखना चाहिए, ये सभी जानते हैं कि कोरोना टेस्टिंग ऐसी चीज नहीं है जो आप छिपा सकते हों, इसे राज्यवार सूची से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देना होता है। कोई राज्य टेस्टिंग को नहीं छुपा सकता है। दिल्ली में प्रति दस लाख पर टेस्टिंग कई राज्यों से ज्यादा है। जब ज्यादा टेस्टिंग करेंगे तो केस सामने आएंगे, केस छिपाना इस बीमारी से लडऩे का कतई रास्ता नहीं है। यह ज्वालामुखी पर बैठने जैसा होगा और कब फटेगा नहीं कह सकते। इसलिए आईसीएमआर को ज्यादा लैब को मंजूरी देनी चाहिए, ज्यादा टेस्टिंग करवाने दीजिए जैसे बाकी बीमारियों की जांच करवा सकते हैं ऐसे ही इसकी छूट दे दीजिए। 

सवाल: इससे कितना फर्क पड़ेगा, केंद्र ऐसा क्यों नहीं करना चाहता, आप क्यों करवाना चाहते हैं?
जवाब: जिस देश ने सामुदायिक फैलाव मान लिया, इस बीमारी से लडने के सभी नियम बदल जाते हैं। कंटेनमेंट जोन जैसा नहीं होता, संक्रमण से बचने के सभी उपाय और क्या चिकित्सीय सुविधाओं की जरूरत है, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड आदि सभी तौर-तरीके बदल जाते हैं। 

सवाल: निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए मनमाना पैसा वसूला जा रहा है, सख्त नियम 
कब बनेंगे?

जवाब: बीमारी के नाम पर व्यापार दुर्भाग्यपूर्ण है। इसीलिए हमने गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर की, चार- छह लैब जो देर से रिपोर्ट दे रही थीं उनके खिलाफ कार्रवाई की। राज्य सरकार ने अभी आदेश दिया कि बेड की उपलब्धता, किस सेवा का कितना पैसा ले रहे हैं ये बताएं। दिल्ली सरकार प्राइवेट अस्पतालों पर अंकुश लगा रही है और मनमानी वसूली पर कार्रवाई भी कर रही है। 

सवाल: सरकारी अस्पतालों में ऐसा क्या हुआ जो विश्वास था वो क्यों कम हो रहा है? 
जवाब: मैं नहीं मानूंगा कि विश्वास कम हो रहा है। क्योंकि इन्हीं अस्पतालों से लोग ठीक होकर गए। समाज में धारणा है मैक्स, अपोलो हैं तो एडवांस इलाज होता है। इस बीमारी में हालांकि कुछ दवाएं हैं और बाकी तो ऑक्सीजन, वेंटिलेटर का सपोर्ट महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए कहूंगा कि हमारे सभी अस्पतालों में ये सुविधाएं हैं। जो भी मरीज दाखिला चाहते हैं जरूर आएं कोई परेशानी हो तो हेल्पलाइन पर संपर्क करें, ऐप पर संपर्क करें, सहयोग किया जाएगा। 

सवाल: कोरोना से लडऩे वाले डॉक्टरों को वेतन नहीं मिला? 
जवाब: सही कह रहे हैं आप, कस्तूरबा अस्पताल निगम का है जहां कई महीने से वेतन नहीं मिला, शिक्षकों को वेतन नहीं मिला। मई तक का दिल्ली सरकार ने भुगतान किया हुआ है फिर वेतन क्यों नहीं मिल रहा है। आप सरकार तो कोरोना योद्धाओं की मौत पर एक करोड़ रुपए की सहायता परिजनों को देती है।

सवाल: अस्पतालों में बेड को लेकर क्या स्थिति है?
जवाब: कुछ कोविड अस्पताल पूरी तरह से तय कर दिए गए हैं। कुछ अस्पताल हैं जहां कोविड के लिए अलग बेड हैं बाकी बीमारियों के लिए अलग हैं। 4400 बेड कोविड मरीजों के लिए सुरक्षित हैं और बाकी के लिए 10 हजार हैं। कोविड के लिए 9600 बेड हैं। यह जानकारी ऐप पर भी है। अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई है प्राइवेट अस्पतालों की निगरानी के लिए।

सवाल: प्राइवेट अस्पतालों के अमानवीय व्यवहार को रोकने के लिए क्या तैयारी की है? 
जवाब: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दो टूक कहा है कि यदि निजी अस्पतालों में किसी तरह का अमानवीय काम किया गया तो उसका लाइसेंस रद्द करने और उसे टेकओवर करने की कार्रवाई की जाएगी। 

सवाल: सरकारी अस्पताल में जाएं, वहां बेड मिलेंगे, अस्पतालों की दिक्कतें डराती हैं, वास्तव में स्थितियां कैसी हैं?
जवाब: दोनों बातें हैं, ऐसा नहीं कि गलत खबरें चल रही हैं। एक तरफ सरकारी तैयारी है, जिसमें 9600 बिस्तर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए हैं। चार हजार दिल्ली सरकार के अस्पतालों में हैं व केंद्र सरकार के अस्पतालों में 1260 हैं, कुछ प्राइवेट अस्पताल के बेड हैं। लोग प्राइवेट में जाना चाहते हैं, वे जब वहां गए तो बेड नहीं मिले। कई अस्पतालों में बेड नहीं हैं, कई ने मरीजों को घुमाया। लेकिन 46 प्रतिशत रिजर्व बेड आज भी खाली हैं। सरकारी अस्पतालों में लोग जाना नहीं चाहते हैं। इन्हीं सरकारी अस्पतालों से 2600 एलएनजेपी से ठीक भी हुए हैं। कुछ वीडियो भी दिखे हैं उस पर भी कार्रवाई कर रहे हैं। मैं अपील करूंगा कि सरकारी अस्पतालों में जाएं, वहां उपचार मिलेगा। हम जल्द ही चयनित बैंक्वेट हॉल, स्टेडियम, होटल को कोरोना अस्पताल में कन्वर्ट कर देंगे। महेश वर्मा कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक 15 जुलाई तक 1780 वेंटिलेटर की जरूरत होगी। अभी 344 हैं और उनमें 254 खाली हैं।

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