Friday, Apr 10, 2020
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कोरोना लॉकडाउन: महाराष्ट्र में बिहार, राजस्थान, यूपी के लोग बेरोजगार, मुश्किल में जान

  • Updated on 3/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के चलते देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन तो कर दिया गया है, लेकिन इसके नकारात्मक असर भी देखने को मिल रहे हैं। लोग जहां बेरोजगार हो गए हैं, वहीं उनके लिए खाने पीने के लाले भी पड़ते दिख रहे हैं। इस मानवीय पहलू को देखते हुए सरकारों ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन फिर भी ये नाकाफी साबित हो रहे हैं। गरीब और मजदूरों को इस लॉकडाउन की सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। दिल्ली में भी कुछ मजदूरों का बुरा हाल है, यहां वे लोग पैदल ही अपने गांव जाने को मजबूर हैं। 

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महाराष्ट्र में तो बढ़ती महंगाई के बीच हजारों पूर्वोतर के लोग बेरोजगार हो गए हैं। बिहार, झारखंड, यूपी राजस्थान और पश्चिम बंगाल से रोजीरोटी के लिए महाराष्ट्र गए मजदूरों को तो बुरा हाल है। खास बात यह है कि अब वे चाहकर भी अपने प्रदेशों को नहीं लौट पा रहे हैं। हालात यह है कि उनको भूखे पेट सोने की नौबत आ रही है। इतना ही नहीं, मुंबई, पुणे में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। बिना रोजगार के यहां बाहरी लोगों का टिकना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ये लोग अपने प्रदेशों की सरकारों से गुहार लगा रहे हैं। 

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इस बीच महाराष्ट्र सरकार भी इन लोगों के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। लेकिन, हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह है कि अभी तो लॉकडाउन की शुरूआत हुई है। जैसे-जैसे दिन गुजरेंगे, वैसे-वैसे हालात बेकाबू हो सकते हैं, अगर सरकार ने दूरगामी कदम नहीं उठाए। बेरोजगारों को किराए के साथ खाने-पीने का भी इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है।

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मजदूरों की बेबसी की आलाम यह हैकि लोग अपने प्रदेशों में पहुंचने के लिए तरह-तरह के जोखिम उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने हाल ही ऐसे दो कंटेनर ट्रकों को पकड़ा है, जो करीब 300 श्रमिकों को राजस्थान लेकर जा रहे थे। कंटेनर ट्रकों में श्रमिकों को ठूंसकर भरा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार ऐसे मजदूरों के लिए क्या कदम उठा रही है। इनके रहने और खाने पीने की कौन जिम्मेदारी ले रहा है।

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लोगों का आरोप है कि नोटबंदी की तरह देशभर में भी लॉकडाउन किया गया। लोगों को बिना चेतावनी के बीच-भंवर में छोड़ दिया गया। गरीब-मजदूरों को अपने प्रदेश लौटने की कोई सुविधा नहीं दी गई। कुछ मजदूरों का आरोप है कि कोरोना वायरस से वे मरे या ना मरे, लेकिन उससे पहले भूख से जरूर मर जाएंगे। 

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कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि सरकारों को ऐसे मजदूरों के लिए परिवहन व्यवस्था जरूर करनी चाहिए थी। ये लोग अपने गांव में ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। अभी भी सरकारें चाहें तो जरुरी सुरक्षा इंतजाम के साथ परिवहन व्यवस्था चला सकती है। ऐसे मजदूरों की पहले मेडिकल जांच करनी होगी और फिर इन्हें छोटे-छोटे ग्रुप में रवाना करना होगा। नहीं तो ये लोग मजबूरी में घर से बाहर निकलने को मजबूर हो जाएंगे। तब हालात और दयनीय और नियंत्रण के बाहर हो सकते हैं।

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