Thursday, Jun 01, 2023
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coronavirus cases in allahabad high court by a 65 percent djsgnt

कोरोना का असर! इलाहाबाद हाईकोर्ट में 65 फीसद केस की पेशी कम

  • Updated on 7/23/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस का कहर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। वायरस का असर देशभर के हर सेक्टर पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। चारों तरफ नाकारात्मकता भरे माहौल के बीच कोरोना का असर न्यायिक प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन से गंभीर मामलों की पेशी में करीब 65 फीसदी आयी है।

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2019 में हर माह 20 हजार केस की पेशी होती थी
राष्ट्रीय न्यायिक जांच ग्रिड के मुताबिक साल 2019 में हर माह लगभग 20 हजार केस की पेशी होती थी। वहीं पेशी जुलाई 2020 में घटकर महज 5 हजार पर आ गई है। जुलाई 2020 में अब तक 5,157 केस की पेशी हुई है। ग्रिड के मुताबिक जब मार्च महीने में लॉकडाउन की शुरूआत हो रही थी तब तक 8 हजार केस की पेशी हाईकोर्ट में हो चुकी थी। उससे पहले जनवरी और फरवरी के माह में 22 हजार केस की पेशी होती थी।

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रिट याचिकाओं में भी आई कमी
ग्रिड के मुताबिक जनवरी-फरवरी माह में रिट याचिकाएं 1,038 दायर हुआ करती थी। मार्च में यह घटकर 190 हो गई। वहीं अप्रैल और मई महीने में यह आंकड़ा महज 36 ही रहा। जनवरी और फरवरी महीने में हाईकोर्ट में क्रमश: 63 और 60 क्रिमिनल केस आए। यह आंकड़ा मार्च महीने में गिरकर 31 हो गया। वहीं अप्रैल से मई के बीच महज 21 क्रिमिनल केस की पेशी हुई। जबकि जून में कोई भी केस सामने नहीं आए।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक लंबित केस
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 18 मार्च से रिमांड और जमानत याचिका को छोड़ सभी प्रकार की सुनवाई बंद कर दी गई थी। लॉकडाउन बढ़ने के बाद हाईकोर्ट ने जरूरी केस की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू कर दी थी। बता दें, इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले से ही सर्वाधिक केस लंबित होने के मामले में बदनाम है। देशभर के हाईकोर्ट में सबसे अधिक लंबित केस इलाहाबाद हाईकोर्ट में है।          

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