Sunday, Apr 18, 2021
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चीन और WHO चाहते तो बचाई जा सकती थी लाखों की जान, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

  • Updated on 1/19/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। चीन (China) के वुहान शहर (Wuhan) से निकले कोरोना वायरस (Coronavirus) से आज भारत समेत पूरी दुनिया जूझ रही है। हालांकि, दुनियाभर में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है, लेकिन संक्रमण के कारण जान-माल का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई शायद ही कभी हो। इसका जिम्मेदार जितना चीन है उतना ही विश्व स्थास्थ्य संगठन (WHO) भी है। इस महामारी के जिम्मेदार चीन के साथ डब्ल्यूएचओ का नाम इसलिए जोड़ा जा रहा हैं, क्योंकि 'इंडिपेंडेंट पैनल फॉर पैन्डेमिक प्रिपेयर्डनेस एंड रिस्पॉन्स' ने अपनी एक रिपोर्ट में बड़ा चौंका देने वाला खुलासा किया है।

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कोरोना के जिम्मेदारी चीन और डब्ल्यूएचओ- रिपोर्ट
एक स्वतंत्र पैनल की ओर से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अगर चाहता तो समय रहते कोरोना वायरस को दुनियाभर में फैलने से रोक सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके अलावा विश्व स्थास्थ्य संगठन का भी इसके लिए जिम्मेदार माना गया है, क्योंकि जब चीन में कोरोना वायरस का पहला मामला रिपोर्ट किया गया था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन बीजिंग के साथ मिलकर इसे खत्म करने की दिशा में तेजी से काम कर सकते थे, लेकिन उन्होंने भी इसे दरकिनार किया, जिसका खामियाजा आज पूरी दुनिया भुगत रही है।

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चीन और डब्ल्यूएचओ का लापरवाही के कारण फैला कोरोना
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि न सिर्फ चीन बल्कि डब्ल्यूएचओ भी इस लापरवाही में बराबर का भागीदार है। अगर ये दोनों तेजी से काम करते और जागरुकता शुरूआत में ही दुनियाभर में फैला देते तो आज लाखों जिंदगियों को बचाया जा सकता है। रिपोर्ट में इन दोनों की लापरवाही का खुलासा करते हुए कहा कि चीन और डब्ल्यूएचओ की लापरवाही के कारण ही दुनियाभर में कोरोना महामारी फैली, और लाखों जिंदगियों को अपना निवाला बना लिया।

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रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ की लापरवाही का खुलासा
रिपोर्ट में कोरोना के फैलने के संबंध में अधिक जानकारी देते हुए कहा गया है कि कोरोना के शुरुआती दौर के क्रोनोलॉजी का मुल्यांकन इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि वो समय ऐसा था जब इस महामारी के खिलाफ युद्ध स्तर पर काम शुरू कर देना चाहिए था। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को जनवरी में ही अपने यहां स्थानीय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अधिक बलपूर्वक लागू किया जा सकता था।

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रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ की आलोचना
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ की आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट् ने महामारी की जानकारी मिलने के बाद भी 22 जनवरी, 2020 तक अपनी आपातकालीन समिति को भी इस वायरस के बढ़ते प्रकोप की जानकारी नहीं दी और न ही इसके निदान के संबंध में कोई बैठक बुलाई। डब्ल्यूएचओ समय रहते कोरोना के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ।

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