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कोरोना संकट के बीच आई ये लाइलाज बीमारी, इंसानों को बचाने के लिए घोड़ों को दी जाती है मौत

  • Updated on 7/3/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना महामारी के बीच अब घोड़ो से सम्बंधित एक बीमारी आतंक फैला रही है। ये बीमारी है घोड़ो में संक्रमण की तरह फैलने वाली बीमारी ग्लैंडर्स। ये बीमारी इंसानों में भी घोड़ो से आसानी से आ सकती है।

पिछले साल इसके कुछ केस भारत में देखने को मिले थे लेकिन अब दिल्ली में ग्लैंडर्स बीमारी से जुड़े कुछ मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

कोरोना संकट के बीच दिल्ली में आया ग्लैंडर्स का खतरा, घोड़ों को छूने से फैलती है बीमारी

दिल्ली में संक्रमित मामले
बताया जा रहा है कि दिल्ली में एक घोड़ा ग्लैंडर्स संक्रमित पाया गया है। इस घोड़े को एक शादी समारोह में इस्तेमाल किया गया था। ऐसे में शादी में आए और घोड़े के आसपास आए लोगों के लिए इस बीमारी को लेकर खतरा बढ़ गया है। ये एक छूत की बीमारी है जो घोड़े को छूने भर से फैल जाती है।

वहीँ, पेटा इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 2019 में 8 और 2018 में 40 घोड़े ग्लैंडर्स संक्रमित पाए गए थे।

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क्या है ग्लैंडर्स बीमारी
ग्लैंडर्स बीमारी घोड़ों में पाई जाने वाली एक जानलेवा संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी का संक्रमण होने पर घोड़े की नाक बहने लगती है, उसे सांस लेने में काफी दिक्कत होती है, घोड़े का शरीर सूखने लगता है और उसके पूरे शरीर में गांठे हो जाती हैं। ये बीमारी इतनी घातक है कि इससे छुटकारा पाने के लिए घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है।

इतना ही नहीं ये बीमारी गधों और खच्चरों में भी पाई जाती है और ये किसी भी पालतू पशु में आसानी से पहुंच सकती हैं। ये बीमारी बरखोडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है।

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भयानक है ये बीमारी
जानकारों ने बताया है कि ये बीमारी काफी ज्यादा भयंकर है और इसका इलाज दवाओं से भी नहीं होता है, इसलिए जानवर को फिर मारना ही अंतिम उपाय रह जाता है। इस बीमारी के बैक्टीरिया सेल में प्रवेश कर जाते हैं और फिर ये घोड़े के शरीर को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। इससे घोड़े के शरीर में गांठे बन जाती है और फिर उनमें इन्फेक्शन हो जाता है। इसके बाद घोड़ा उठने में असमर्थ हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है लेकिन ये तब भी शरीर से नहीं जाता इसलिए घोड़े के शव को फिर दफनाना पड़ता है।

ऐसे लगाया जाता है इसका पता
इस बीमारी का पता लगाना भी आसान नहीं है। एलाइजा और कॉम्लीमेंट फिक्सेशन (सीएफटी) टेस्ट के जरिए इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि इस बीमारी से घोड़ों के  फेफड़ों में गांठें और सांस लेने में तकलीफ के कारण श्वसनतंत्र की म्यूकस मैमरेन पर घाव बन जाते हैं। फिर घोड़े को सर्दी और जाती है और उसकी नाक बहने लगती है, बाद में  सैप्टीसीमिया से उसकी मौत हो जाती है।

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इंसान में फैलने के ये है लक्षण
वहीँ, इस बीमारी के इंसानों में भी फैलने के आसार आसानी से बन जाते हैं। जो लोग घोड़ों को पालते हैं, उनके करीब रहते हैं। उन्हें ये बीमारी होने के चांस ज्यादा होते हैं। इंसानों में त्वचा, नाक, मुंह और सांस के द्वारा ये बीमारी फैल सकती है। इसमें इंसानों को छाती में दर्द ,मांस पेशियों में दर्द, छाती, अकडन, सर्दी, सर दर्द और नाक बहने लगती है।

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क्या है इसका इलाज
ग्लैंडर्स बीमारी अभी तक लाइलाज है। इससे केवल बचा जा सकता है। इस बीमारी के कारण पिछले साल
महाराष्ट्र में 17 घोड़ो को दया मृत्यु दी गई थी। घोड़ों के मारे जाने से अच्छा है कि उनका ख्याल रखा जाए ताकि ये बीमारी न हो सके। इसके लिए किसी भी बीमार पशु का तुरंत इलाज कराएं। यदि कोई बीमार पशु है भी उसे बाकी सब से अलग रखें। उसका खाना-पीना सभी कुछ अलग रखें और डॉक्टर की सलाह लें।

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