Sunday, Mar 07, 2021
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अब इंसानों को कोरोना से बचाएंगे घोड़े? ICMR को मिली एंटीसेरा ट्रायल की मंजूरी

  • Updated on 10/7/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत में फैले कोरोना वायरस (Corona virus)  को नियंत्रित करने और इसे संभावित इलाज को तलाशने के लिए दवा नियामक भारतीय औषधि महानियंत्रक ने 'एंटीसेरा' का इंसानों पर ट्रायल करने लिए मंजूरी दे दी है। 

इस मंजूरी के बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) इस पर तेजी से काम करेगी और कोरोना संक्रमित मरीजों से पहले इसके ट्रायल करेगी। इस बारे में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कहा है कि यह एंटीसेरा एक उम्मीद की तरह है अगर ये कामयाब रहा तो भारत को जल्द कोरोना एंटीबॉडी मिल सकता है। 

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घोड़ो से बना एंटीसेरा 
इस बारे में आईसीएमआर का कहना है कि 'एंटीसेरा (Antisera) खास है क्योंकि यह घोड़ों में अक्रिय सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) वायरस का इंजेक्शन देकर विकसित किया गया है। 

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने जानकारी देते हुए बताया कि 'एंटीसेरा को आईसीएमआर ने हैदराबाद स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ मिलकर बनाया है और हमें उसका क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) करने की अनुमति मिल गई है।

इससे पहले अपने एक बयान में आईसीएमआर ने कहा था, 'कोरोना से लड़कर ठीक हो चुके मरीजों से प्राप्त प्लाज्मा भी इस उद्देश्य को पूरा कर सकता है, लेकिन एंटीबॉडी का प्रोफाइल, उसका प्रभावीपन एक से दूसरे मरीजों में अलग होता है।

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क्या है एंटीसेरा?
एंटीसेरा एक खास तरह का ब्लड सीरम है। इसमें किसी विशेष रोगाणु से लड़ने की क्षमता रखने वाले एंटीबॉडी की मात्रा अधिक होती है। इंसान के शरीर में किसी भी विशेष संक्रमण के आक्रमण होता है और उससे लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को तुरंत बढ़ाने की जरूरत होती है तब इस ब्लड सीरम को इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है। 

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इन बीमारियों में दिया गया 
इससे पहले इस एंटीसेरा, जिसे हॉर्स सेरा भी कहा जाता है को कई तरह के विषाणुओं के नाश के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है। इस ब्लड सीरम को कई तरह के वायरल, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, रैबीज, हेपेटाइटस बी, वैक्सीनिया वायरस, टेटनस, बोटूलिज्म और डायरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है। 

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