Thursday, Apr 02, 2020
coronavirus outbreak in china

कोरोना वायरस की चपेट में चीन

  • Updated on 1/27/2020

विश्व स्वास्थ्य संकट का रूप लेते जा रहे कोरोना वायरस के संक्रमण ने एक बार फिर इस बात का संकेत दिया है कि जिस तेजी से इंसान ने विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की की है, लगभग उसी तेजी से नई और खतरनाक संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं। ये बीमारियां एक तरह की चेतावनी भी हैं कि आने वाले समय में इस तरह के संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए बहुत कुछ करना होगा।
चीन को ऐसे समय में इस जानलेवा वायरस से जूझना पड़ रहा है जबकि करोड़ों चीनी अपने सबसे बड़े उत्सवों में से एक ‘लूनर न्यू ईयर’ यानी चंद्र नव वर्ष की तैयारी कर रहे हैं। 
चीन में कोरोना वायरस से 4 दर्जन से अधिक लोग मर चुके हैं जबकि इस वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या 1500 का आंकड़ा पार कर चुकी है। चिंता की बात है कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुए इस वायरस के प्रकोप में आने वाले 17 से अधिक शहर चीन में सील किए जा चुके हैं और पेइचिंग में एमरजैंसी लागू कर दी गई है तथा इसके थमने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे। कई शहरों में आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
इस वायरस ने सारी दुनिया में दहशत की स्थिति पैदा कर दी है और विमानन कम्पनियां भी इससे डर कर बीमार लोगों को अपने विमानों में जगह देने से इंकार कर रही हैं।
चीन तक ही सीमित न रह कर इस वायरस ने भारत सहित विश्व के 7 देशों में दस्तक दे दी है और भारत, फ्रांस, इंगलैंड तथा दक्षिण कोरिया सहित कुछ अन्य देशों में भी इस वायरस के मामले सामने आ रहे हैं। 
चीन तथा विश्व के अन्य प्रभावित देशों के अस्पताल मरीजों की बढ़ती संख्या से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह से चीन में लगभग 5 करोड़ लोगों की आवाजाही बाधित हो चुकी है।
चीन के साथ ही हांगकांग ने भी भीड़ जमा होने से रोकने के लिए कई बड़े समारोहों को रद्द कर दिया है। वुहान सहित अन्य शहरों में वायरस को फैलने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं जिसके अंतर्गत सार्वजनिक परिवहन तक पर रोक लगा दी गई है। 
नैशनल हैल्थ कमीशन के अनुसार जिन मामलों की पुष्टि हो चुकी है उनमें 200 से अधिक लोग गंभीर हालत में हैं जबकि कुछ लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। साथ ही 1000 से अधिक संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई है जो इसकी चपेट में हो सकते हैं। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चीन के लिए आपातकाल के रूप में घोषित किया है लेकिन इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित नहीं किया है। 
सबसे अधिक मामले वाले वुहान शहर में वीरवार की रात 6 दिनों में 1000 बिस्तरों वाले एक अस्पताल का निर्माण करने की दौड़ शुरू हुई। स्थानीय श्रमिकों के लिए एक हॉलीडे कॉम्प्लैक्स की जगह पर इस अस्पताल के निर्माण में क्रेनों तथा बुलडोजरों को झोंक दिया गया है। 
अगले हफ्ते तक तैयार होकर खुलने वाला यह अस्पताल 2003 में सार्स वायरस के फैलने पर बीजिंग में स्थापित अस्पताल के समान होगा। सार्स वायरस से लगभग 800 लोग मारे गए थे और यह रोग लगभग 30 देशों तक पहुंच गया था। 
उस संकट के दौरान 7000 श्रमिकों ने केवल एक सप्ताह में बीजिंग में शियाओतांगशान अस्पताल का निर्माण किया। दो महीनों में इसने देश के कुल हिस्से में से सातवें हिस्से के बराबर सार्स रोगियों का इलाज किया। 
चीनी मीडिया के अनुसार इसने मैडीकल साइंस के इतिहास में एक चमत्कार कर दिखाया था। उनके अनुसार नया वुहान अस्पताल वर्तमान चिकित्सा संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए है।
हालांकि, इससे पहले वुहान में इलाज करवाने अस्पताल पहुंचे कई लोगों का कहना था कि उन्हें वहां से लौटा दिया गया क्योंकि वे पहले ही मरीजों से भरे हुए थे। 
चीनी सोशल मीडिया पर पोस्ट कुछ वीडियोज में वहां के अस्पतालों में फैली अराजकता और निराशा के दृश्य दिखाई दे रहे थे। एक वीडियो को फिल्माने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि ड्यूटी पर केवल 4 डॉक्टर थे और लोग इलाज के लिए कई घंटों से इंतजार कर रहे थे। एक अन्य वीडियो में एक मरीज फर्श पर बेहोश पड़ा था।

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