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cosmetic industry preparing to shock china imports sohsnt

चीन से आयात को झटका देने की तैयारी में कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, बढ़ रही है स्वदेशी प्रोडक्ट की मांग

  • Updated on 7/14/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर हालिया तनाव के बाद से अब देश में चीनी सामान के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। ऐसे में कास्मेटिक इंडस्ट्री ने चीन से आयात होने वाले कच्चे माल को लेकर अभी कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया है, लेकिन उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में चीन सामान के आयात में कमी दर्ज की गई है। देश में प्रति वर्ष करोड़ों रूपए के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट आयात किए जाते हैं। 

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चीनी कास्मेटिक प्रोडक्ट्स में 40 फीसदी की कमी 
ऐसे में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने इस दिशा में बड़ी पहल करते हुए औद्योगिक सेक्टर में हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू कर दिया है। अकेले उत्तराखंड में चीनी कास्मेटिक प्रोडक्ट पर लगभग 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में अब हर्बल कास्मेटिक के की बढ़ती मांग के बाद चीनी प्रोडक्ट्स के आयात में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।

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पतंजलि और हिमालय पूर्णतया स्वदेशी कंपनी
फिलहाल, प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में प्रत्येक वर्ष लगभग 2, 400 सौ क्विंटल कच्चे माल की खपत है। वहीं पतंजलि और हिमालया कंपनी कच्चे माल को लेकर किसी भी तरह से चीन पर निर्भर नहीं हैं। ये कंपनी पूरी तरह से स्वदेशी हैं। इन दोनों कपनियों के उत्पादों की देश में बड़ी मांग है। ये कंपनी अपने प्रोडक्ट में स्वदेशी कच्चे माल का इस्तेमाल करती हैं।

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कंपनियों के प्रोड्क्ट्स में होता है कच्चे माल का इस्तेमाल
पतंजलि और हिमालया कंपनी अपने प्रोड्क्ट्स के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से कच्चे माल की आपूर्ति करती हैं, ये कंपनियां अपने उत्पादों में जड़ी बूटी- फल, बीज पत्तियां सहीत अन्य देशी कच्चे माल का प्रयोग करती हैं। वहीं रसायनों के विकल्प के चौर पर कंपनियां 50 से अधिक फूलों  के एसेंस का प्रयोग करती हैं, जिनमें गुलाब, गेंदा, चंपा, चमेली, लिल्ली, गुड़हल, कनेर, मोगरा, ऑर्किड, जरबरा, नाइटक्वीन, गुलमोहर आदि शामिल होते हैं। 


 

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