Saturday, Oct 01, 2022
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court order for investigation against up deputy cm keshav maurya in alleged fake degree case rkdsnt

चुनाव से पहले यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य के खिलाफ कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

  • Updated on 8/12/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर कथित फर्जी डिग्री के आधार पर पेट्रोल पंप की डीलरशिप लेने और चुनावों के नामांकन के समय कथित झूठा हलफनामा दाखिल करने के आरोपों की जांच के लिए यहां की स्थानीय अदालत ने बुधवार को कैंट थाना को प्रारंभिक जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कोर्ट का यह आदेश मौर्य को सियासी नुकसान पहुंचा सकता है। 

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याचिकाकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी के अधिवक्ता उमा शंकर चतुर्वेदी ने बताया कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नम्रता सिंह ने कैंट थाना प्रभारी को इस मामले की प्राथमिक जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में पेश करने को कहा है, इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। 

 

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सामाजिक कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी का आरोप है कि केशव प्रसाद मौर्य ने वर्ष 2007 में शहर पश्चिमी विधानसभा चुनाव और इसके बाद के कई चुनावों में नामांकन के समय दाखिल हलफनामा में हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का उल्लेख किया और इन्हीं कागजातों के आधार पर इंडियन आयल से पेट्रोल पंप हासिल किया। 

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उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि आरटीआई के तहत इंडियन ऑयल से प्राप्त केशव प्रसाद मौर्य की स्नातक की डिग्री की प्रति में द्वितीय वर्ष का रोल नंबर किसी मंजू सिंह के नाम दर्ज है, जबकि तृतीय वर्ष का रोल नंबर केशव प्रसाद मौर्य के नाम पर है। 

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त्रिपाठी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जनवरी, 2012 में दिए एक निर्णय में हिंदी साहित्य सम्मेलन की डिग्रियों को अमान्य घोषित कर दिया था। इस तरह से केशव प्रसाद मौर्य को अपने हलफनामे में इन डिग्रियों का उल्लेख नहीं करना चाहिए था। 

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