Wednesday, Oct 05, 2022
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अदालत ने कॉलिजियम की बैठक पर CIC के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

  • Updated on 3/28/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सीआईसी ने उच्चतम न्यायालय कॉलिजियम की 12 दिसंबर 2018 की बैठक के एजेंडे की प्रति मांगने वाली आरटीआई अपील को खारिज कर दिया था। इस बैठक में कई न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नति देने के संबंध में कथित रूप से निर्णय लिए गए थे। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की एकल पीठ ने इस मामले में याचिका पर कुछ देर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 

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याचिकाकर्ता एवं कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिए सीआईसी के 16 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी है जिसने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत उनकी दूसरी अपील को खारिज कर दिया था और उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि वह अधिकारियों को 26 फरवरी 2019 को आरटीआई आवेदन में मांगी गई उपलब्ध जानकारी का खुलासा करें। याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी 2019 न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने एक साक्षात्कार में इस बात पर निराशा जताई थी कि 12 दिसंबर 2018 के कॉलिजियम के प्रस्ताव को उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है। वह कॉलिजियम की इस बैठक में मौजूद थे और 30 दिसंबर 2018 को सेवानिवृत्त हो गए थे। 

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याचिका में कहा गया है, 'उन्हें (न्यायमूर्ति लोकुर को) यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि, ‘जब हम कुछ फैसले कर लेते हैं तो उन्हें (वेबसाइट पर) अपलोड किया जाता है। मुझे इस बात की निराशा है कि उन्हें अपलोड नहीं किया गया।’ ऐसी परिस्थितियों में, न्यायपालिका में नियुक्ती प्रक्रिया में पारदर्शीता के हित में, 26 फरवरी 2019 को याचिकाकर्ता ने एक आरटीआई आवेदन के जरिए उच्चतम न्यायालय के सीपीआईओ से 12 दिसंबर 2018 को हुई कॉलिजियम की बैठक का एजेंडा, उसमें लिए गए फैसले और प्रस्तावों की प्रति मांगी थी।’’ 

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यहां यह जिक्र करना मुनासिब रहेगा कि भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की आत्मकथा ‘जस्टिस फॉर जज’ के मुताबिक, राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन को 12 दिसंबर 2018 की कॉलिजियम की बैठक में पदोन्नति देने को मंजूरी दी गई थी। किताब के मुताबिक, मामला कथित रूप से लीक हो गया था जिसके बाद न्यायमूर्ति गोगोई ने जनवरी 2019 तक मामले पर रोक लगा दी थी, क्योंकि 15 दिसंबर 2018 को शीतकालीन छुट्टियां शुरू हो गई थी। 

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न्यायमूर्ति लोकुर के सेवानिवृत्त होने के बाद जनवरी 2019 में नए कॉलिजियम का गठन किया गया। पुस्तक के मुताबिक, नए कॉलिजियम ने 10 जनवरी 2019 को अपने प्रस्ताव में न्यायमूर्ति नंदराजोग और न्यायमूर्ति मेनन को पदोन्नति देकर शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनाने को मंजूरी नहीं दी। याचिका में उन न्यायाधीशों का जिक्र नहीं है जिनके नामों को कथित रूप से मंजूरी दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ)की ओर से सूचना नहीं देने के खिलाफ दायर पहली अपील का निपटारा करते हुए प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने कहा था कि कि 10 जनवरी 2019 के कॉलेजियम प्रस्ताव के मद्देनजर, यह स्पष्ट था कि 12 दिसंबर 2018 की कॉलेजियम बैठक में भले ही कुछ निर्णय लिए गए थे लेकिन उनपर जरूरी परामर्श पूरा नहीं किया जा सका था, इसलिए कोई प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित नहीं किया गया था, और इसलिए मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती है। 

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उसमें कहा गया है कि इसके बाद दूसरी अपील सीआईसी में दायर गई थी जिसने 10 जनवरी 2019 के प्रस्ताव पर भरोसा किया और कहा कि 12 दिसंबर 2018 की बैठक का प्रस्ताव कॉलिजियम की 10 जनवरी 2019 को हुई बैठक से स्पष्ट है, लिहाजा सूचना याची को नहीं जा सकी। याचिकाकर्ता ने सीआईसी के आदेश को खारिज करने का आग्रह इस आधार पर किया है कि उन्होंने 12 दिसंबर 2018 को कॉलिजियम की बैठक के ‘एजेंडे की प्रति’ मांगी है न कि सारांश या संदर्भ। 

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