Saturday, Jul 31, 2021
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मोदी सरकार के आलोचकों को दिल्ली पुलिस फंसाने की कोशिश कर रही है : भाकपा

  • Updated on 9/24/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) फरवरी में हुए दंगों के मामले में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को फंसाने की कोशिश कर रही है, जो भाजपा नीत सरकार की ‘‘जन-विरोधी नीतियों’ की आलोचना कर रहे हैं। मामले की जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए भाकपा ने कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच एक ‘‘साजिश’’ है, जिसका लक्ष्य हिंसा के असली गुनहगारों को पकडऩे के बजाय उन लोगों को अपराधी साबित करना है जो मानवाधिकार हनन और अन्याय के खिलाफ बोल रहे हैं। 

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उल्लेखनीय है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस ने हाल ही में अपने एक पूरक आरोपपत्र में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक अपूर्वानंद का नाम लिया गया है। उनका नाम कथित रूप से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) प्रदर्शनकारियों को उकसाने और लामबंद करने के कारण इसमें आया है। 

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भाकपा के बयान में कहा गया है, ‘‘पार्टी उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका की निंदा करती है, जिसमें भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और महासचिव, नेशनल फेडरेशन ऑफ इडियन वूमन एनी राजा सहित नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। ’’ बयान में कहा गया है कि सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण और लेाकतांत्रिक प्रदर्शन कानून के खिलाफ लोगों की असहमति का वैध और संवैधानिक अधिकार है। ये प्रदर्शन इतने प्रभावी थे कि इसने भाजपा को हिला कर रख दिया, जो प्रदर्शनों को दंगों की साजिश के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है। 

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भाकपा ने कहा , ‘‘यह स्तब्ध कर देने वाला है कि दिल्ली पुलिस मौजूदा सरकार की जन विरोधी नीतियों और कार्यक्रमों की आलोचना करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को फंसाने की कोशिश कर रही है।’’ भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा कि भाकपा नेता एनी राजा के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी मामले में गिरफ्तार लोगों के बयान के आधार पर आरोपपत्र में नामजद किया गया है। इनमें सलमान खुर्शीद, वृंदा करात, कविता कृष्णन और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, योगेंद्र यादव, हर्ष मंदर, राहुल रॉय, अपूर्वानंद और सबा दीवान के नाम भी शामिल हैं। 

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बयान में कहा गया है, ‘‘इन सभी लोगों ने मुस्लिम महिलाओं के नेतृत्व में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के प्रति एकजुटता दिखाई थी और अब इसे एक बड़ी साजिश बताया जा रहा है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘इसके उलट, आरोपपत्र में भाजपा से जुड़े नेताओं की भूमिकाओं का उल्लेख नहीं है, जिन्होंने भड़काऊ भाषण दिये थे। ’’ 

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बयान में कहा गया है कि भाकपा ने अन्य विपक्षी दलों के साथ इस पर ङ्क्षचता जताते हुए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा है और एक मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच कराने का अनुरोध किया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 और 26 फरवरी के बीच हुए दंगों में 53 लोग मारे गये थे और 581 अन्य घायल हुए थे, जिनमें से 97 लोगों को गोलियां लगी थी। 

 

 

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