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CPIM attacks BJP Modi govt JNU Jawaharlal Nehru University agitation

माकपा ने #JNU शिक्षा व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर किया हमला

  • Updated on 11/12/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। माकपा ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों के विरोध को सही ठहराते हुये कहा है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर हर आय वर्ग के छात्रों के लिये सुलभ शिक्षा व्यवस्था बहाल करनी चाहिये। 

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माकपा पोलित ब्यूरो ने एक बयान जारी कर फीस बढ़ोतरी के विरोध में आंदोलनरत छात्रों के विरुद्ध सोमवार को हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुये मंगलवार को कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावास शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी कर देश के अग्रणी शिक्षण संस्थान को धनाड्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले छात्रों तक सीमित करने कर दिया है। 

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पार्टी ने कहा कि अब तक जेएनयू की छवि समाज के सभी वर्गों के छात्रों के लिये सुलभ शिक्षा सुविधा मुहैया कराने वाले शिक्षण संस्थान की थी। इसकी वजह से 2017 के शैक्षणिक सत्र में जेएनयू में 40 प्रतिशत ऐसे छात्रों को दाखिला मिल सका था जिनके अभिभावक की मासिक आय 12 हजार रुपये तक थी। 

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पोलित ब्यूरो ने कहा कि फीस बढ़ोतरी के बाद अब कम आय वर्ग वाले छात्रों को जेएनयू में दाखिला नहीं मिल पायेगा। यह देश की युवा प्रतिभा पर कुठाराघात है। पार्टी ने कहा कि जेएनयू के कुलपति ने इस मामले में छात्र संघ के साथ बातचीत करने से मना कर दिया है, जिससे विवाद और ज्यादा गहरा जायेगा। 

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पोलित ब्यूरो ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से कुलपति को छात्रों से तत्काल बातचीत करने के लिए कहने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि निशंक ने इस मामले में सोमवार को छात्रों से बात करने का आश्वासन दिया था। 

उल्लेखनीय है कि सोमवार को जेएनयू के दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों ने निशंक का घेराव करते हुये फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू थे।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की आलोचना की
माकपा ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की राज्यपाल द्वारा सिफारिश करने के फैसले की आलोचना करते हुये इसे जल्दबाजी में किया गया फैसला बताया है। माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा मंगलवार को जारी बयान में कहा गया है कि महाराष्ट्र में जल्दबाजी दिखाते हुये राष्ट्रपति शासन थोपा गया है। पोलित ब्यूरो ने कहा कि राज्यपाल ने राकांपा को निर्वाचित विधायकों का बहुमत जुटाकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिये आज रात साढ़े आठ बजे तक का समय दिया था लेकिन उन्होंने अपने ही द्वारा निर्धारित समयसीमा का पालन किये बिना राज्य में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। 

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पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेश यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले जल्दबाजी में मंत्रिमंडल की बैठक बुला कर मंत्रिमंडल ने राज्यपाल की अनुशंसा को स्वीकार करने की राष्ट्रपति को महाराष्ट्र में केन्द्रीय शासन लागू करने की सिफारिश कर दी। माकपा ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाने का यह तरीका, एसआर बोम्बई मामले में दिये गये उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोधाभाषी है। इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि बहुमत साबित करने का एकमात्र स्थान सदन है। पार्टी ने महाराष्ट्र के मामले में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन करने का सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि भाजपा सरकार संविधान को नजरंदाज कर सभी फैसले कर रही है।  
 

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