Thursday, Jan 20, 2022
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दिल्ली दंगों पर CPM की रिपोर्ट- हिंसा भड़काने में अमित शाह का मंत्रालय और हिंदू जिम्मेदार

  • Updated on 12/10/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) मामले की जांच में आए दिन बड़े और चौंका देने वाले खुलासे होते रहे हैं लेकिन यह खुलासे प्रशासन की तरफ से होते रहे हैं। लेकिन अब सीएए-एनआरसी कानूनों के विरोध में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट में गृह मंत्री अमित शाह को सीधे हिंसा भड़कने और जांच में पक्षपात करने का जिम्मेदार ठहराया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमित शाह के अंतर्गत आने वाला गृह मंत्रालय हिंसा भड़कने के पीछे कई मायनों में जिम्मेदार था। सीपीएम ने अपनी इस रिपोर्ट को ‘उत्तर-पूर्व दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा, फरवरी 2020’ नाम दिया है।

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा को दिल्ली दंगे कहा जाता है जो गलत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगे वह होते हैं, जहां दोनों पक्ष बराबर के भागीदार होते हैं। लेकिन इन दंगों में आक्रामकता हिंदू पक्ष की भीड़ की तरफ से थी, जबकि दूसरे पक्ष ने खुद को ऐसे हमलों से बचाने की कोशिश की थी। लगभग सभी क्षेत्रों में ऐसे वीडियो सबूत के तौर पर मौजूद हैं जहां पुलिस भी हिंदुत्ववादी भीड़ का साथ देते हुए दिखाई दे रही है।

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बता दें, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को संशोधिन नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें कम से कम 53 लोगों की जान चली गई थी और 200 अन्य घायल हुए थे। इनमें 40 मुस्लिम और 13 हिंदू शामिल थे।

लेफ्ट पार्टी की रिपोर्ट में आगे कहा गया- “11 मार्च 2020 को अमित शाह ने संसद को बताया कि वे दिल्ली के प्रमुख पुलिस अधिकारियों से संपर्क में हैं और हालात की निगरानी कर रहे हैं। सवाल यह है कि 24 फरवरी को जब हिंसा भड़की, तब कर्फ्यू क्यों नहीं लगाया गया? आखिर क्यों सेना नहीं तैनात की गई? यहां तक की दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की संख्या भी बेहद कम और तैनाती काफी देर से की गई थी।” दावा किया गया है कि 23 फरवरी से 27 फरवरी के बीच 26 लाख आबादी वाले एक जिले में सिर्फ 1393 से 4756 जवान ही तैनात रहे थे।

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इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि  इस बारे में कोई जांच होती उससे पहले ही गृह मंत्री ने 11 मार्च को लोकसभा में इसका ब्योरा दे दिया और इसके बाद, जो जांच हुईं उनमें सिर्फ उनका नजरिया वैध करार देने के लिए हुई थीं। शाह ने अपनी पार्टी के नेताओं के उन भाषणों को भी नजरअंदाज कर दिया जिसमें देशद्रोहियों को गोली मारने की बात कही गई थी।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट के अनुसार,  शाह ने उल्टे विपक्ष पर ही नफरत भरे भाषणों के लिए आरोप लगा दिया और कहा कि कांग्रेस ने ही 14 दिसंबर 2019 को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से कहा था कि वे करो या मरो की लड़ाई के लिए सड़कों पर आ जाएं। इस तरह से अमित शाह ने न केवल हिंसा के लिए विपक्ष पार्टी को जिम्मेदार ठहरा दिया, बल्कि  अल्पसंख्यक समुदाय को भी इन मामलों में घसीट लिया।

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