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धर्मनिरपेक्ष भारत में 'नाम' सुनते ही ऑर्डर कैंसिल, आने वाला है बहुत बड़ा 'धर्मिक संकट'!

  • Updated on 8/1/2019

एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में जब किसी को अपना नाम बताने से पहले ये सोचना पड़े कि सामने वाले की क्या प्रतिक्रिया होगी, तो निश्चय ही वो देश धर्मांधता की खाई के मुहाने पर खड़ा है। ऑनलाइन आर्डर पर खाना पहुंचाने वाली कंपनी ‘जोमैटो’ (Zomato) के डिलिवरी ब्वॉय के साथ कुछ इसी प्रकार की एक घटना हुई। ये जानने के बाद कि डिलिवरी ब्वॉय एक मुस्लिम है ग्राहक ने ऑर्डर कैंसिल कर दिया। जिस देश में अबुल कलाम आजाद जैसे दिग्गज हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देते नहीं थकते थे, वहां इतने विकास के बाद लोगों की मानसिकता इस प्रकार से संकुचित हो जाएगी किसने सोचा था।

इतनी घृणा कहां से आ गई?

किसी के धर्म को लेकर भारत जैसे देश में इतनी घृणा कहां से आ गई? जो देश विविधता में एकता का संदेश देता है। जिसकी मिट्टी में हजारों भाषाएं, संस्कृतियां, धर्म, जातियां फली-फूली हैं। ‘सर्वधर्म समभाव’ जिसकी मिट्टी से उपजा है। वहां इस प्रकार की घटनाएं होना एक ऐसी दसत्क है जो इशारा कर रही है कि इस देश में बहुत बड़ा ‘धार्मिक संकट’ आने वाला है।   

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कैसा होगा वो धार्मिक संकट?

कैसा होगा वो धार्मिक संकट? वो संकट हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या जैन धर्म का नहीं, वो संकट होगा ‘मानव धर्म’ का। जी हां, इस देश में सभी लोग अपने-अपने धर्म को मजबूत बनाने में मानव धर्म से इतने दूर हो गए हैं कि प्रभु श्री राम के नाम पर/अल्लाह के नाम पर हत्याएं कर रहे हैं। किसी का नाम जानकर उसके हाथ से खाना लेने में जहां लोगों को दिक्कत हो रही है तो सोचिए कि उसका धर्म उसकी मानसिकता पर कितना हावी होगा। उस व्यक्ति ने मुस्लिम डिलिवरी ब्वॉय से खाना लेने से इनकार नहीं किया, उसने इस देश की धर्मनिरपेक्षता पर लांछन लगाया है। ठेंगा दिखाया देश के उन रहबरों को जो देश में हो रही मॉबलिंचिंग की घटनाओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि उनका अपना धर्म बदनाम हो रहा है। क्या यही है उनका धर्म ‘नफरत’?

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ये थी भारत की पहचान... जो खो रही है

प्यार, विश्वास, भाईचारा, विभिन्न संस्कृतियों को अपनाना, हर धर्म की इज्जत करना, हर धर्म के त्योहार को झूम कर मनाना, हर भाषा का सम्मान करना और सबसे पहले मानव धर्म की रक्षा करना ये हुआ करती थी भारत की पहचान। आज धर्म की लड़ाई में इस कदर मशगूल है भारतवासी कि अपने देश के मौलिक सिद्धांतों को ही भूल बैठा है।

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मानव धर्म की इज्जत तार-तार

जो व्यक्ति अपने से अलग धर्म के व्यक्ति के हाथ का छुआ खाना लेने को तैयार नहीं, कहीं उसका हाथ गलती से किसी गैर-धर्म के व्यक्ति को छू जाएगा तो वो क्या करेगा? सोचिए! आंख बंद कर लेने से या सच्चाई को झुठलाने से ये सब रुकने वाला नहीं है। देश के बड़े पदों पर बैठे लोग कहते हैं कि हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उनको ये मालूम नहीं कि इस प्रकार के कृत्य मानव धर्म की इज्जत तार-तार कर रहे हैं। हिंदू-मुस्लिम धर्म बदनाम नहीं हो रहा साहब! मानव धर्म बदनाम हो रहा है। मानवता की लाज के चीथड़े कर दिए हैं इस धर्म की लड़ाई ने। इस इशारे को नहीं समझे तो इसका बहुत बड़ा भुगतान सारी मानव जाति को करना होगा।

 

लेखिका: कामिनी बिष्ट

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है। 

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