Tuesday, Nov 30, 2021
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वृक्षों को काटना, नदियों को दूषित करना साधु हत्या के समान है: मोरारी बापू

  • Updated on 11/17/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वृक्षों को काटना, नदियों को दूषित करना साधु हत्या के समान ही है। पर्यावरण के प्रति केवल आज ही सजगता नहीं बढ़ी। रामचरित मानस जैसे प्राचीन ग्रन्थ में भी बहुत पहले ही इस पर विचार किया गया है। वृक्षों, नदियों और पहाड़ों आदि प्राकृतिक संसाधनों को साधु के समान बताकर उनकी रक्षा करने की बात कही गयी है। तुलसीदास जी ने तो वृक्ष को साधु बताया है।

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कोविड नियमों से आयोजित रामकथा में सरस व संगीतमय तरीके से साधु संत की बताई परिभाषा 
यह बाद दिल्ली स्थित सिरी फोर्ट सभागार में मानस साधु चरित मानस शीर्षक से आयोजित की जा रही रामकथा में वाचक संत मोरारी बापू ने कही। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर सामूहिक स्नान और पूजा करके नदियों को दूषित करना, अनावश्यक वृक्षों को काटना और अकारण पहाड़ों को नष्ट करना साधु की हत्या करने जैसा ही है। कोविड नियमों से सीमित संख्या में उपस्थित श्रोताओं के बीच सरस और संगीतमय तरीके से रामकथा की प्रस्तुति में कथावाचक मोरारी बापू सभी को साधु और संत की परिभाषा से परिचित करवाया।

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जो अतिशय सहन करे दूसरों के लिए जीए वो होता है साधु
वे कहते हैं साधु कौन है जो अतिशय सहन करे। साधुओं में सहनशीलता अति आवश्यक है। यही तपस्या है उसकी यही भक्ति है जो आज कम होती जा रही है। संत तो दूसरों के लिए जीते हैं। सत्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने गुरुनानक देवजी की जपुजी साहिब नामक बाणी में से उदाहरण लेते हुए कहा कि सत्य या राम कानों के द्वारा हमारे भीतर प्रवेश करता है। यानि सुनने से सुणिये सत सन्तोख ज्ञान, सुणिये अठसठ का इसनान, सुणिये पढ़-पढ़ पावै मान, सुणिये लागै सहज ध्यान। नानक भगतां सदा विगास, सुणिये दुख पाप का नास। अर्थात सुनने से ज्ञान भी जाग्रत होता है और सुनने से ही दुख और पापों का नाश भी होता है।

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शरीर के विभिन्न केंद्र बिंदुओं के स्थान बदलने से मनुष्य के मन में उमड़ते हैं भाव
इसलिए भक्ति-ज्ञान की चर्चा सुनिए जरूर, चाहे किसी से भी सुनिए। ताकि आपके आन्तरिक कें द्र भी सक्रिय हो सकें । योगी मानते हैं कि हमारे शरीर में 68 आन्तरिक केंद्र होते हैं जबकि भक्तिमार्ग मानता है कि 108 आन्तरिक कें द्र्र बिंदु होते हैं जिनके स्थान बदलने से आदमी कभी रोता है, कभी हंसता है या खुश होता है। यानि अलग-अलग कें द्र बिन्दुओं के सक्रिय होने से अलग-अलग भाव मनुष्य के मन में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। 

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