Monday, Jan 30, 2023
-->
dariya ganj sunday book market

किताबों का जागीर, दरियागंज पुस्तक विक्रताओं के पास गजब का संग्रह

  • Updated on 8/28/2021

नई दिल्ली/चांदनी कुमारी। दरियागंज संडे बुक मार्केट न जाने कितने लोगों को डॉक्टर, इंजीनियर, साहित्यकार, वकील  बनाया है। यहां दुनियाभर  का साहित्य सड़कों पर देखने को मिलता है इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए सभी तरह की किताबें उपलब्ध होती हैं।  दरियागंज का  64 साल पुराना बाजार न जाने कितने लोगों के लिए ज्ञान का दरिया बना। अब इसका पता बदल गया है अब यह बाजार आसफ अली मार्ग महिला हाट पर चला गया है। जिस रविवार बारिश हो जाती है बाजार पहले की तरह ही डिलाईट सिनेमा वाली सड़कों के दोनों तरफ लगाई जाती है।

पुरानी दिल्ली की बिना उबली चाय के लोग हैं दीवाने

समय को लेकर है परेशानी 
दरियागंज पटरी संडे बुक बाजार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमर सईद कहते हैं कि महिला हाट वाली जगह को अभी कम ही लोग जानते हैं। यहां  276 दुकानदारों को जगह आवंटित की गई थी, लेकिन अभी यहां पर 80 स्टॉल है और दुकानदार ज्यादा है ऐसे में दुकानदार ने तय किया है कि सभी दुकानदार नीचे ही दुकान लगाएंगे। यह बाजार पार्किंग की छत पर है।  बारिश में नीचे पानी भरा जाता है, जिसके कारण खरीदार यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। कमर सईद का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत समय को लेकर है अभी शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक दुकान लगाने का समय दिया गया है एक घंटे दुकान लगाने और एक घंटे दुकान उड़ाने में समय लगता 8 बजे के बाद ग्राहक भी कम हो जाते हैं ऐसे में दो से तीन घंटे की समय  में ही किताबें बिकती हैं ।

कुलिया चाट खाने का है मन तो पहुंचे चावड़ी बाजार 120 साल पुरानी दुकान पर

बदल गया है खरीदारी करने का तरीका 
वहीं 70 साल के किशन का कहना है कि 30 साल हो गए यहां दुकान लगाते हुए अब तीसरी पीढ़ी यहां मेरी दुकान लगा रही है। लेकिन पहले और अब की खरीदारी में काफी फर्क आ गया है ऐसे नहीं है कि पढ़ने वाले बच्चे नहीं है लेकिन अब ऑनलाइन किताबें मिल जाती और कीमत कम होती है। ज्यादातर किताबों की आपको ऑनलाइन डुप्लीकेट पीडीएफ मिल जाएगी। जिसके वजह से बच्चे सस्ते दामों में फ्री की किताबें खरीद लेते हैं। किशन का कहना है कि मैं सभी तरह की  प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ बच्चों की ड्राइंग बुक रखता हूं।

20 हजार से ऊपर है हिंदी अंग्रेजी साहित्य की किताबें 
राधेश्याम  जो 11 साल से संडे बुक मार्केट में किताबों की दुकान लगा रहा है उनका कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब 8 हफ्ते से दुकान लगाते हो गए गए हैं ।अभी पहले की तुलना में 50 फीसदी ही काम है इसके कई कारण है पहला जो बाजार सिफ्ट हुआ है पहले दरियागंज के सड़कों पर ज्यादा ग्राहक आते थे यहां मैं सुबह 6 बजे लेकर रात 8 बजे तक किताबों का दुकान लगाता था। लेकिन अब हाट ही 4 बजे खुलता है उसके बाद किताबें सजाते  हैं । ग्राहकों के पास भी  दो से तीन घंटे का ही समय मिलता है । वहां 185 की पर्ची कटती है यहां पर 25 पर्ची कटती थी ऐसे में फायदा कम नुकसान ज्यादा है। मेरे पास हिंदी साहित्य और बच्चों की किताबें ज्यादा मिलती है गोदाम में 20000 हजार से ऊपर किताबें हिंदी और अंग्रेजी साहित्य की पड़ी हुई है। मेरे पास साहित्य के पुराने और नए दोनों लेखकों के उपन्यास मिल जाएंगे।  

29वें विश्व पुस्तक मेले का हुआ सफल आयोजन, 68 देशों से पाठकों ने लिया हिस्सा

अंग्रेजी राइटर की किताबें ज्यादा
दुकानदार  पिंटू का कहना है कि पहले मेरे पिता जी दुकान लगते थे अब मैं लगा रहा हूं हम यहां  29 साल से दुकान लगा रहे हैं। जो किताबें मेरे पास है वह सबके पास आपको नहीं मिलेगी। लगभग सभी पब्लिशर्स की ट्रेंड अंग्रेजी नोबेल हम यहां रखते हैं पेंगुइन के लगभग 10000 हजार किताबें हमारे गोदाम में हैं। सबसे ज्यादा यहां विदेशी राइटर्स के नोबेल बिकते हैं। जो कि अमेरिका, यूरोप से कंटेनर में आती है। मेरे पास अंग्रेजी राइटर की ही किताबें हैं।

दिल्लीः वर्चुअल प्लेटफाॅर्म पर आयोजित होगा विश्व पुस्तक मेला

क्यों मिलती है यहां किताबें सस्ती 
पिंटू का कहना है कि यहां किताबें कई तरह की मिलती हैं एक भारत में जो लोग किताबें पढ़ कर कबाड़ी वालों को बेचते हैं वह किताबें यहां के मार्केट में मिलती हैं । साहित्य कभी भी पुराना नहीं होता है ऐसे में अमेरिका, यूरोप आदि देशों में जो किताबें लोग पढ़ कर बेच देते हैं वह किताबें भारत में आ जाती है। यह किताबें दुकानदारों को किलों के भाव से मिलती है और यह यहां 50 रुपए 100 रुपए  की कीमत पर बेचते हैं ।जिससे हमें अच्छा फायदा मिल जाता है।  

comments

.
.
.
.
.