Saturday, Apr 04, 2020
dcw swati maliwal reaction on rss chief mohan bhagwat

RSS प्रमुख के बयान पर भड़कीं स्वाति मालीवाल, कहा- भारत पढ़ेगा तभी आगे बढ़ेगा

  • Updated on 2/18/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) ने शिक्षित और संपन्न परिवारों में तलाक के मामले अधिक होने से जुड़े आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि मेरा भारत तो पढ़ेगा भी और आगे बढ़ेगा भी।

DCW ने ट्वीट कर दी प्रतिक्रिया
स्वाति मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, 'महिलाओं के लिए उल्टे बयान देते हैं और अब शिक्षा को ही गलत बता रहे हैं। क्या इनको देश के पढ़न से भी समस्या है? देश की महिलाएं पढ़ें-लिखें सम्पन्न बनें, क्या इन्हें इससे भी तकलीफ है?' उन्होंने आगे कहा, 'मेरा भारत तो पढ़ेगा भी और आगे बढ़ेगा भी। ऐसी दकियानूसी बातों का आज के समय मे कोई महत्त्व नहीं।'

Swati Maliwal

 

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शिक्षा और संपन्नता अहंकार पैदा कर रहा है- RSS
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा था कि इन दिनों तलाक के अधिक मामले शिक्षित और संपन्न परिवारों में सामने आ रहे हैं क्योंकि शिक्षा और संपन्नता अहंकार पैदा कर रहा है जिसका नतीजा परिवार का टूटना है।

उन्होंने अहमदाबाद (Ahmedabad) में एक कार्यक्रम में यह भी कहा था कि भारत में हिंदू समाज का कोई विकल्प नहीं है। आरएसएस द्वारा जारी बयान के अनुसार भागवत ने कहा, मौजूदा समय में तलाक के मामले बहुत बढ़ गए हैं। लोग निरर्थक मुद्दों पर लड़ रहे हैं। तलाक के मामले शिक्षित और संपन्न परिवारों में अधिक हैं क्योंकि शिक्षा और संपन्नता से अहंकार आता है जिसका नतीजा परिवारों का टूटना है। इससे समाज भी खंडित होता है क्योंकि समाज भी एक परिवार है।

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कांग्रेस ने भी की आलोचना
तलाक पर कांग्रेस (Congress) ने भी भागवत के बयान की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा था कि यह बयान संस्कारी नहीं, बल्कि अहंकारी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने संवाददाताओं से कहा था, 'यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी जितनी ङ्क्षनदा की जाए वह कम है। क्या संघ परिवार और भाजपा यह चाहते हैं कि इस देश के सभी लोग गरीब और अनपढ़ बन जाएं? इस प्रकार की दकियानुसी मानसिकता न समाज के लिए और न ही सरकार के लिए सही है। उन्होंने दावा किया, मुझे लगता है कि यह बयान संस्कारी नहीं, अहंकारी नहीं है।'

 

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