Tuesday, Feb 18, 2020
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डीडीए फ्लैट आवंटन में बवाल, मंत्री ने मामले में सही तरह से ध्यान देने को कहा

  • Updated on 11/9/2018

नई दिल्ली/निशांत राघव। कभी अपने निर्माण और बेहतर गुणवत्ता के लिए पहचाने जाने वाले डीडीए से लोगों का विश्वास दिनोंदिन कम होता जा रहा है। ऐसे में डीडीए की दो आवासीय फ्लैट योजनाओं में लगभग पचास फीसदी से अधिक फ्लैटों के सरेंडर करने के बाद अब नया बवाल सामने आने पर मंत्री ने भी अपना ऐतराज जताया है। उन्होंने इस प्रकरण पर ट्वीट भी किया है। 

आवंटियों का आरोप है कि उन्होंने डीडीए से एलआईजी फ्लैट की मांग की थी, लेकिन उन्हें ईडब्ल्यूएस फ्लैट दे दिया गया। जिसके लिए पंद्रह लाख रुपये कीमत भी वसूली गई, जबकि वह महज पांच लाख रुपये कीमत के फ्लैट हैं। आवंटियों की शिकायत पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप पुरी ने भी डीडीए को मामले की सही तरह से जांच करने व गौर करने के लिए कहा है। 

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उधर डीडीए का कहना है कि अब कुछ भी होने की संभावना नहीं है। क्योंकि सभी विभागों और थर्ड पार्टी ऑडिट के बाद राशि व अन्य चीजें तय की जाती हैं। वैसे भी सरेंडर करने की अवधि भी गुजर चुकी है। 

उल्लेखनीय डीडीए ने वर्ष 2014 में 25,040 फ्लैट की योजना लांच की थी तथा वर्ष 2017 में 12, 617 फ्लैटों की योजना निकाली गई। दोनों योजनाओं में ड्रा में सफल होने के बाद करीब पचास फीसदी तक आवंटियों ने फ्लैट सरेंडर कर दिये थे। 

अब इन योजनाओं में बड़ी संख्या में सफल आवंटियों ने यह आरोप लगाया है कि उन्हें धोखा देते हुए डीडीए ने एलआईजी के स्थान पर ईडब्ल्यूएस फ्लैट दे दिया। जबकि उन्होंने एलआईजी फ्लैट के लिए ही डीडीए में आवेदन किया था। लोगों ने व्यक्तिगततौर पर मिलने के बाद भी कोई हल न निकलता देख तो मंत्री हरदीप पुरी से भी ट्वीट व पत्र के जरिये शिकायत की है। साथ ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का भी मन बना रहे हैं।

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मंत्री हरदीप पुरी ने इस मामले में कहा कि लोगों से लगातार मिली शिकायत के आधार पर उन्होंने डीडीए को पूरे मामले की पड़ताल के लिए और उचित कार्रवाई प्रभावित लोगों से मिलकर करने के लिए कहा था। जिसके बाद डीडीए ने भी उन्हें बताया कि कई लोगों ने मिलकर इस समस्या के बारे में बताया था। आवंटियों की शिकायत के आधार पर उन्हें बताया गया है कि किस तरह से फ्लैट की राशि और जगह तय की गई है। 

इस संबंध में डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्री को लोगों की शिकायत के आधार पर की गई कार्रवाई के संबंध में जवाब दिया गया है। चूंकि आवंटियों ने पहले फ्लैट का कब्जा ले लिया और अब सरेंडर करने की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। ऐसे में इस प्रकरण में अधिक राशि अथवा एलआईजी के स्थान पर ईडब्ल्यूएस फ्लैट दिये जाने के मसले में कुछ भी होने की संभावना नहीं है। 

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शुरू से विवादित रही हैं दोनों योजनाएं
दरअसल 2014 और 2017 में लांच की गई आवासीय फ्लैट योजना शुरू से ही विवादित रही। 2014 में शुरुआत में जिन फ्लैटों को डीडीए ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए तैयार किया था, उन्हें अंतिम क्षणों में योजना में एलआईजी फ्लैट के रूप में शामिल कर लिया गया। कारण बताया गया कि केंद्र ने फ्लैट निर्माण के लिए सब्सिडी देने से इंकार कर दिया, इसलिए यह करना पड़ा। इसके बाद लगभग दस हजार फ्लैटों का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका।

इस योजना के बाद 2017 में आई दूसरी आवासीय फ्लैट योजना में भी विवाद जुड़ा रहा। लोगों में प्रचार किया गया कि डीडीए की एलआईजी फ्लैट व अन्य श्रेणी के फ्लैटों को जाकर स्वयं देख सकते हैं। लेकिन इस बार अपेक्षाकृत कम आवेदन आने के बाद हुए ड्रा के पश्चात करीब 50 फीसदी से अधिक आवंटियों ने फ्लैट सरेंडर कर दिये। साथ ही फ्लैट की कीमत को लेकर भी लोगों में खासी नाराजगी रही है।

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वैभव, अमित चौधरी, सुशांत, अरविंद भट्ट आदि ने अपनी शिकायत में कहा है कि किस तरह की हालत फ्लैटों की और इलाके की है, डीडीए को सोचना चाहिए। पांच लाख रुपये कीमत वाले फ्लैट को पंद्रह लाख में बेचना उचित नहीं है। 

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