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ddca become reason for rajat sharma resignation

रजत शर्मा की पावर कम करना इस्तीफे का बना कारण

  • Updated on 11/18/2019

नई दिल्ली/ संजीव यादव। विनोद तिहारा का निलंबन रद्द होना और उनकी वापसी वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा (Rajat Sharma) के इस्तीफे का बड़ा कारण बनी। यही नहीं एपेक्स मेंबर की मीटिंग में सभी निदेशकों के द्वारा उनकी खिलाफत करना और उन्हें अध्यक्ष होते हुए नजरअंदाज करना मुख्य रूप से था। बीते 48 घंटे के घटनाक्रम के बाद डीडीसीए (DDCA) में एक घमासान मच गया है कि मौजूदा समय में कार्यकारिणी कैसे काम करेगी। बता दें कि डीडीसीए के अध्यक्ष पद से वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के इस्तीफ के बाद सीईओ (CEO) रवि चोपड़ा, क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के दो सदस्य सुनील वाल्सन और यशपाल शर्मा ने भी अपना पद छोड़ दिया है। यही नहीं मौजूदा कार्यकारिणी में कई अन्य लोग भी त्यागपत्र देने को तैयार हैं।

केपी भास्कर को हटाए जाने की संभावना
फिलहाल मौजूदा हालत को देखते हुए डीडीसीए के वाइस प्रेसीडेंट राकेश बंसल को सभी जिम्मेदारियां दी गई हैं। यही नहीं 1 दिसम्बर से पहले अतुल वासन की अगुवाई वाली चयनसमिति और कोच केपी भास्कर (Krishnan Bhaskar Pillai) को हटाए जाने की संभावना है। हालांकि शनिवार को रजत शर्मा ने ट्विटर के माध्यम से कहा था कि यहां काम करना आसान नहीं था, लेकिन आपके विश्वास ने मुझे ताकत दी। यहां निहित स्वार्थ की राजनीति है, जबकि सार्वजनिक हित और इमानदारी मेरेे लिए सबसे पहले है। 

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1 दिसम्बर को होगी अगली बैठक 
डीडीसीए इस्तीफे के बाद 1 दिसम्बर को बीसीसीआई की एजीएम बैठक है जिसमें तय होगा कि आखिरकार डीडीसीए अब किस राह पर चलेगा,क्योंकि जहां मदन लाल गु्रप ने सभी मैंबरों को हटाने को इस्तीफे की बात कहते हुए दोबारा चुनाव की संभावना व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक सभी निदेशकों ने निर्णय भी ले लिया है कि महासचिव विनोद तिहारा को दोबारा से सभी शक्तियां दी जाएगीं। 

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ये है इस्तीफे का बड़ा कारण 
जुलाई 2018 में रजत शर्मा ने डीडीसीए का चुनाव जीता था, उसी दौरान विनोद तिहारा ने महासचिव पद पर जीत दर्ज की थी। जिसके बाद से ही दोनों में तकरार हो गए थी। बताया जाता है कि विनोद तिहारा को एक माह बाद ही पद से हटा दिया गया था और उनकी सभी पावर सीज कर दी गई थी, जिसके बाद से ही डीडीसीए में कोच, खर्चे सहित अन्य मामलों पर तकरार चल रही थी। हालांकि इस दौरान रजत शर्मा ने अपने कई पदाधिकारी सहित किक्रेट कोच बनाए और अब तक के कार्यकाल में सबसे ज्यादा मौका खिलाड़ियों को दिया। यही नहीं, उन्हीं के कार्यकाल में युवा सहित कई नए बच्चों को खेलने का मौका भी मिला। बताया जाता है कि शर्मा के कार्यकाल में ही सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई सहित जिला क्रिकेट एसोसिएशन के लिए गाइडलाइन बनाई, जिसके बाद जब क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और आकाश चोपड़ा को पद दिया गया। तब से विनोद तिहाड़ा के अलावा अन्य निदेशक शर्मा के खिलाफ खड़े हो गए, लेकिन शर्मा ने सभी को जवाब दिया और बताया कि दिल्ली क्रिकेट के भविष्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत ही उनकी नियुक्ति की गई। इसी बीच विनोद तिहाड़ा ने पहले सेशन कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से अपना निलंबन वापिस करवा लिया,लेकिन उन्हें पावर नहीं दी गई। इसी बीच डीडीडीए तिहाड़ा के निलंबन पर दोबारा कोर्ट सहित एपेक्टस बॉडी में चली गई।


शुक्रवार रात ये हुआ
बताया जाता है कि रजत शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान बोर्ठ को सुधारने के लिए कई कड़े फैसले लिए, हालांकि उसके पीछे उन्होंने वजह बताई कि जब तक कड़े फैसले नहीं लिए जाते तब तक बोर्ड को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। उनके दावों के मुताबिक इस बोर्ड में कई खामियां थीं, जिसको उन्होंने हटाना शुरू किया था, लेकिन इसी बीच पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेतली के निधन के बाद उनकी टीम लगातार कमजोर होती चली गई। इसी बीच बीते शुक्रवार को एपेक्स की बैठक हुई, जिसमें बोर्ड के सभी डायरेक्टर मौजूद थे, जिन्होंने सर्वसम्मति से शर्मा के शक्तियों को कम करने और उनकी पावर को फ्रीज करने का प्रस्ताव पास कर दिया, जिसकी जानकारी शर्मा को लगी और उन्होंने एकाएक शनिवार को सुबह अपने इस्तीके की घोषणा कर दी। 
 

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