Sunday, Dec 08, 2019
death-anniversary-of-dev-anand

पुण्यतिथि विशेष : देवानंद को यूं ही नहीं कहा जाता था सदाबहार अभिनेता

  • Updated on 12/2/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित  बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देवानंद (Dev Anand) ने कठोर परिश्रम के बाद बॉलीवुड में एक लोकप्रिय अभिनेता के तौर पर सफलता पाई है। देवानंद का जन्म पंजाब के गुरूदासपुर में एक साधारण से परिवार में हुआ था।

Dev Anand

जिवन से जुड़ी कुछ खास बाते
26 दिसंबर 1923 को जन्में देवानंद ने अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई लाहौर के एक सरकारी स्कूल में की थी। देवानंद को आगे पढ़ने की भी इच्छा थी लेकिन घर से पैसों का सपोर्ट न मिलने पर उन्होंने सोच लिया था कि अगर काम करना है तो फिल्म इंडस्ट्री में ही क्यों न करा जाए। उन्हें एक्टिंग का शौक पहले से ही था। जिसके बाद से वे अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए मुंबई निकल गए थे।

30 रूपये लेकर आए थे मुंबई
शुरुआती दौर में देवानंद को कई तकलीफों का सामना करना पड़ा था। बता दें कि जब देवानंद मुंबई आए थे तब उनकी जेब में केवल 30 रूपये ही थे। उनके पास रहने की कोई जगह तक नहीं थी। इतना ही नहीं उन्हें कई रातें तो रेलवे स्टेशन पर ही काटनी पड़ी थी। उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि वे ठीक से 2 टाइम खाना भी खा सकें।

मिलिट्री सेंसर ऑफिस में मिली पहली नौकरी
आप को बता दें कि सबके दिलों पर राज करने वाले इस अभीनेता ने मुंबई मे आने के थोड़े समय बाद मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी की थी। लगभग 1 साल मिलिट्री सेंसर में काम करने के बाद देवानंद को इप्टा में काम मिला, जहां उन्हें छोटे मोटे नाटकों में रोल मिलने लगे थे। जिसके बाद से उन्हें फिल्मों के भी ऑफर आने लगे थे।

एसे मिली करीयर की पहली फिल्म
देव आनंद ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1946 में प्यारेलाल संतोषी की हम एक हैं से की। उन्होंने ठिक दो साल बाद उन्होंने अपनी पहली Lead अभीनेता वाली फिल्म 'शहीद लतीफ की जद्दी (Shaheed Latif’s Ziddi) के साथ निभाई, जो उस समय के सुपरस्टार कामिनी कौशल के सामने लगी थी। प्रेम धवन द्वारा लिखित और खेमचंद प्रकाश द्वारा रचित, फिल्म के गाने ब्लॉक बस्टर हिट हुए थे।

फिल्म Industri को दि कई हिट फिल्में 
देव आनंद ने अपने फिल्मी करीयर में 100 से अधिक फिल्मों में काम किया है और गाइड, हरे कृष्णा हरे राम, देस परदेस, ज्वेल थीफ और जॉनी मेरा नाम जैसी हिट फिल्में देने के साथ हमारा मनोरंजन किया। उनके अनुकरणीय कार्य के लिए 2001 में  उन्हें राष्ट्रपति ने पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 

1951 के दौर के समय देवआनंद अपने करिबी दोस्त बोसोम और गुरु दत्त के साथ अपने निर्देशन की पहली फिल्म बाजी के साथ आए। आगे चल कर यह फिल्म बहुत प्रसिद्धि हुई।  970 की फिल्म 'प्रेम पुजारी' से अपने निर्देशन की शुरुआत की। 1949 में, देव आनंद ने निर्माता का निर्माण किया और अपनी खुद की कंपनी नवकेतन शुरू की, जिसने 2011 तक 31 फिल्में बनाईं।

उनकी अन्य लोकप्रिय फिल्में
आर.के.नारायण की साहित्य अकादमी विजेता उपन्यास 'द गाइड' पर बनी उनकी फिल्म ने उनकों 1965 में उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीतीया। 
उनकी अन्य लोकप्रिय फिल्मों में सीआईडी, जब प्यार किसी से होता है, काला बाजार, कालापानी, नौ दो ग्याराह, गहना चोर, हम डॉनो, टैक्सी चालक, तेरे मेरे सपने, हरे रेयर हरे कृष्णा, कुछ नाम शामिल हैं।  भारतीय सिनेमा के सबसे महान और सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक, देव आनंद ने 3 दिसंबर, 2011 को अंतिम सांस ली।

Dev Anand

मिल चुके हैं कई अवार्ड्स
उन्हें 1991 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
2001 में पद्म भूषण 
2002 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार

comments

.
.
.
.
.