Wednesday, Dec 08, 2021
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defeat corona with cancer, bp and depression drugs  before vaccine prsgnt

कैंसर, बीपी और डिप्रेशन की दवाओं से होगा कोरोना मरीजों का इलाज, वैक्सीन से पहले ये जरूरी- शोध

  • Updated on 5/7/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना संक्रमण के कारण डेमेज हो रहे फेफड़ों को बचाने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक अब कैंसर, हाई बीपी और डिप्रेशन की दवाएं मरीजों पर आजमाएंगे। ये सिर्फ एक ट्रायल ही होगा।

इसके लिए वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने बताया है कि वो ऐसे कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर इन दवाओं का ट्रायल करेगा जो अभी अस्पताल नहीं गये हैं और अपने घरों में ही आइसोलेशन में हैं।

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सेफ हैं दवाएं
इस बारे में इस ट्रायल के प्रमुख शोधकर्ता का कहना है कि यह दवा सालों से अलग-अलग रोगों पर इस्तेमाल की जा चुकी हैं जो सेफ है। हालांकि अभी यह ट्रायल भर है लेकिन अगर दवाओं ने असर दिखाया तो इसका फिर इंसानी ट्रायल भी किया जायेगा।

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कैंसर की ये दवा हो रही है इस्तेमाल
बोन मैरो के कैंसर माइलोफाइब्रोसिस में मरीजों को दी जाने वाली रक्सोलिटिनिब नाम की दवा का इस ट्रायल में प्रयोग किया जायेगा। यह दवा सूजन को कम करती है। साथ ही इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करके कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर देती है। इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में शुरू होने वाला है।

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कीमोथैरेपी की दवा
कैंसर में देने वाली दवा टोपोसाइड, भी कोरोना मरीजों को देने की तैयारी की जा रही है। यह दवा लंग कैंसर, लिम्फोमा और टेस्टिकुलर कैंसर के मरीजों की कीमोथैरेपी करने में प्रयोग की जाती है। इस दवा के ट्रायल से पहले अमेरिका के बॉस्टन मेडिकल सेंटर में टोपोसाइड की क्षमता और उसके प्रभाव समझने के लिए रिसर्च की जा रही है।

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डिप्रेशन की दवा
डिप्रेशन में दी जाने वाली एंटी-डिप्रेसेंट फ्लूवॉक्सामाइन का इस्तेमाल कोरोना वायरस से लड़ने के लिए किया जाने वाला है। अभी इसका ट्रायल किया जायेगा। इस दवा से बॉडी में सेरेटोनिन नाम के खुशी के केमिकल का स्तर सुधरता है और इसके साथ ही इस दवा से मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। कोरोना मरीज पर इसका प्रयोग, मरीज की सूजन को रोकेगा और सांस लेने में होने वाली दिक्कत को भी दूर करेगा।

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हाई ब्लडप्रेशर की दवा
हाई बीपी में दी जाने वाली दवा लोसारटन को भी एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। ये दवा इसलिए जरूरी है क्योंकि यह रक्त वाहिनियों में अकड़न पैदा करने वाले तत्वों को नष्ट करता है। इस दवा को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि यह कोरोना वायरस को फेफड़ों को नुकसान पहुचाने से रोकेगी।

सबसे अहम यह कि कोरोना वायरस जिस रिसेप्टर की मदद से कोशिकाओं पर हमला करता है और अपनी संख्या बढ़ाता है, यह दवा उसी रिसेप्टर को ब्लॉक कर देगी।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

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