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मंत्री पद छोड़ने की चेतावनी देने वाले वन मंत्री से सीएम ने कहा, जरूर बनेगा कंडी मार्ग

  • Updated on 5/20/2019

देहरादून/ब्यूरो। महत्वाकांक्षी कंडी मार्ग के चिल्लरखाल-लालढांग परिखंड के निर्माण को लेकर मंत्री पद छोड़ने और आंदोलन करने की चेतावनी देने वाले वनमंत्री हरक सिंह को इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री ने मार्ग के निर्माण को अवश्यंभावी जरूर बताया है परंतु साथ में यह भी कहा है कि इसके लिये धैर्य रखना होगा।

सोमवार को सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पहली बार कंडी मार्ग पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि कंडी मार्ग को लेकर अखबारों में जो कुछ भी छप रहा है वह आधा अधूरा सच है।

वन विभाग या केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकहित में कई कानूनों में बदलाव किया है। पर्यावरण की एनओसी से जुड़े जो काम पहले काफी मुश्किल के बाद होते थे वे आज आनन-फानन में होने लगे हैं। कंडी मार्ग को लेकर जो भी आपत्तियां है उनका निस्तारण भी हो जाएगा।

इसमें समय लगेगा और धैर्य रखना होगा। सीएम का यह बयान अपरोक्ष रूप से वन मंत्री हरक सिंह के लिए एक सलाह है। क्योंकि हरक सिंह ने इस प्रकरण को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि लोक निर्माण विभाग ने कंडी मार्ग पर जल्द काम शुरू नहीं किया तो वह मंत्री पद छोड़कर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि वह क्षेत्र की जनता से चंदा मांगकर इस मार्ग का निर्माण पूरा करेंगे।

क्यों जरूरी है कंडी मार्ग

गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाले कंडी मार्ग (कोटद्वार-रामनगर मार्ग) के बनने से गढ़वाल-कुमाऊं के बीच की दूरी 82 किमी कम हो जाएगी। इस मार्ग की कुल दूरी 90 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 50 किलोमीटर मार्ग कार्बेट टाइगर रिजर्व से होकर जाता है। इस मार्ग के निर्माण के लिए 1976 में डीपीआर बनाई गई थी।

इसमें कोटद्वार से गूलरस्रोत 19.37 किलोमीटर एवं लालढांग गांव से रामनगर तक 20 किलोमीटर तक का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया। इसी बीच 1980 में वन संरक्षण अधिनियम लागू हुआ। इस कारण से इस मार्ग के शेष हिस्से का निर्माण रुक गया। फिलहाल कोटद्वार से रामनगर जाने के लिए प्रदेश के लोगों को उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद-नगीना-धामपुर-अफजलगढ़-काशीपुर होकर जाना पड़ता है। इस मार्ग की दूरी 172 किमी है। 

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