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दिल्ली: यहां देखने को मिलते हैं चांद-मंगल ग्रह के 'अद्भुत' पत्थर और डायनासोर के अंडे

  • Updated on 3/9/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आपने नेशनल म्यूजियम (National Museum) देखा होगा, आपने आर्ट व क्राफ्ट म्यूजियम भी देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी मिनिरल्स म्यूजियम (Minerals Museum) देखा है। जहां धरती से निकलने वाले कीमती पत्थरों को उनके प्राकृतिक रूप में रखा गया हो। हम आज आपको ऐसे ही म्यूजियम के बारे में बताने जा रहे हैं जोकि दिल्ली (Delhi) के दिल कनॉट प्लेस (Connaught Place) में स्थित है। यह म्यूजियम हनुमान मंदिर के ठीक सामने बने राजीव गांधी हैंडिक्रॉफ्ट स्थित डिजाइन गैलरी एंड म्यूजियम है। यहां आपको विभिन्न प्रकार के मिनिरल्स के साथ ही गुजरात के दाहैद से प्राप्त डायनासोर के अंडे व फॉसिल भी देखने को मिलेंगे। 

बता दें कि इस म्यूजियम में दूसरे ग्रह यानि चांद व मंगल से प्राप्त पत्थर को भी रखा गया है। जिसका सर्टिफिकेट बाकायदा नासा द्वारा जारी किया गया है और इसे जर्मनी व अमरीका से खरीदा गया है जोकि इंडिया के अन्य किसी भी म्यूजियम में उपलब्ध नहीं है। यहां रखा एक रॉक तो करोड़ों साल पुराना है। एपोफिलाइट विद स्टिल वाइट नाम का यह रॉक लगभग छह करोड़ पचास लाख साल पुराना है। अभी भी हीरे जैसी चमक पैदा करने वाले इस रॉक को देखकर वाकई कोई इसके उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता। एक ही तरह के रॉक्स को अलग अलग मौसम कैसे प्रभावित करते हैं और प्रकृति उससे कितनी सुंदर रचना बनाती है, यहां यह देखा जा सकता है।

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2010 में हुई थी म्यूजियम की शुरुआत
इस म्यूजियम की शुरुआत 30 सितंबर 2010 को शुरू किया था। जिसे नेशनल हैंडीक्रॉफ्ट गैलरी और सुपर मिनिरल्स द्वारा पीपीपी मोड पर चलाया जाता है। यहां सैकड़ों प्रकार के देशी-विदेशी मिनिरल्स देखने को मिलते हैं। इनकी खूबसूरती देखते ही बनती है क्योंकि प्रकृति से बड़ा कोई कलाकार नहीं होता और उसके कैनवस की सारी लाइनें खास होती हैं, जिसे ये मिनरल रॉक्स साबित करते दिखाई देते हैं। इसके संस्थापक के.सी. पांडे ने बताया कि यहां अधिकतर आने वाले भू-गर्भ विज्ञान व रत्न शास्त्र से जुड़े देशी-विदेशी छात्र व इन विषयों में रूचि रखने वाले लोग आते हैं। जिनमें ज्यादा संख्या विदेशियों की होती है, कई बार वो इन्हें खरीदने में रुचि दिखाते हैं लेकिन ये सब सिर्फ प्रदर्शित किया जाता है बेचा नहीं जाता। 

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नेशनल अवॉर्ड से नवाजी कलाकृतियों के भी करें दीदार
यहां कई नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली कलाकृतियों को भी रखा गया है, जिनमें संगमरमर के सिंगल पत्थर से बनाई गई ‘बनी-ठनी’ नाम से महिला की मूर्ति है। जबकि 200 ग्राम की 200 फीट की दुर्गा की प्रतिमा जिसे सोलहपीठ नाम दिया गया है यहां रखी गई है। इसके अलावा शिल्पगुरू से सम्मानित पंडित महेश चंद शर्मा की चंदन की लकड़ी से बनी कलाकृति पशुपतिनाथ मंदिर, गोल्डन टेंपल सहित एन. दुरईराज की दशावतारम् व पद्मश्री फैजल का थ्रेड वर्क रखा गया है जोकि 3डी इफेक्ट देती हैं। 
टिकट: भारत के पर्यटकों के लिए यहां 100 रुपए की टिकट रखी गई है। जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट का दाम 300 रुपए है। 
समय: सोमवार से शनिवार तक म्यूजियम का समय सुबह 10 से शाम 7 बजे तक रखा गया है। जबकि रविवार को सुबह 11 से शाम 6 बजे तक म्यूजियम देखा जा सकता है। 

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सबसे कीमती गणेश मूर्ति
यहां पन्ना रत्न के परिवार से संबंध रखने वाले ग्रीन एमेन्च्यूरिन की एक गणेश प्रतिमा रखी गई है जो सिंगल स्टोन को काटकर बनाई गई है। इस प्रतिमा का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य करीब 6 करोड़ व क्वॉर्ट पत्थर के गणेश का मूल्य साढे चार करोड़ का है। यहां स्फटिक का एक शिवलिंग है जिसका वेट व इतना आकर्षक है कि ऐसा दूसरा स्फटिक शिवलिंग दूसरा देखने को नहीं मिलता है। जबकि 150 किलोग्राम का करीब 85 लाख कीम का एप्पोफिलाइट व एटिलबाइट पत्थर नेचुरल फार्म में रखा गया है, जिससे पॉजीटिव एनर्जी मिलती है।

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