Wednesday, Apr 01, 2020
delhi environment minister gopal rai visit air quality monitoring station

प्रदूषण से लड़ने के लिए पुराना नहीं, रीयल टाइम डेटा जरूरी- गोपाल राय

  • Updated on 2/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने शुक्रवार को वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (Air quality monitoring station) का दौरा किया, जिसे वाशिंगटन विश्वविद्यालय के सहयोग से स्थापित किया गया है। इस स्टेशन की मदद से प्रदूषण के स्रोतों और प्रदूषण (Pollution) स्तर में इन स्रोतों के योगदान का अध्ययन किया जा सकेगा। 

मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में स्टेशन के दौरे के लिए पहुंचे राय ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने प्रदूषण के स्रोतों और प्रदूषण स्तर में उनके योगदान का अध्ययन करने के लिए वाशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ हाथ मिलाया है। राय ने कहा कि सरकार रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर एक मुहिम आरंभ करेगी। रिपोर्ट की मदद से प्रदूषण के असल स्रोतों का पता चलेगा।      

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पर्यावरण मंत्री ने प्रदूषण के कारणों को समझा
पर्यावरण मंत्री ने दौरा कर यह समझने की कोशिश की कि दिल्ली के अंदर हवा में पीएम-10, पीएम-2.5 और पीएम-1 के बढ़ने और घटने की वजह क्या है। इस केंद्र में लगी मशीनें एक निश्चित समय के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने का कारण बताने में समक्ष हैं। यह मशीनें बता सकती हैं कि एक निश्चित समय में किन कारणों से हवा में पीएम-10, पीएम-2.5 और पीएम-1 की मात्रा बढ़ या घट रही है। 

जन आंदोलन से करेंगे लोगों को जागरूक
इस केंद्र से अगले माह आने वाली अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर सरकार जन आंदोलन के जरिए लोगों को जागरूक करके और कार्य योजना बनाकर दिल्ली के अंदर बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने पर प्रभावी कदम उठाएगी। दिल्ली के अंदर वायु गुणवत्ता में पीएम-10 पीएम-2.5 और पीएम 1 के कण कितनी मात्रा में हैं। इसे लेकर काफी लंबे समय से स्टडीज आती रही हैं। 

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वायु प्रदूषण बढ़ने का स्रोत क्या है?
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगाई गईं मशीनें यह बताने में असफल रही हैं कि एक खास समय में वायु प्रदूषण बढ़ने का स्रोत क्या है, किस वजह से उस समय पीएम-10 व पीएम-2.5 बढ़ गया है, इसी के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों वाशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया और वैज्ञानिक यहां एक साल से अध्ययन कर रहे हैं। 

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रीयल टाइम डाटा जेनरेट करेंगी मशीने
यहां लगी मशीनें रीयल टाइम डाटा जेनरेट करने में सक्षम हैं। यह मशीनें प्रति मिनट यह बताने में सक्षम हैं कि उस समय पीएम-10 और पीएम-2.5 कितना है, सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो आक्साइड कितना है। इसके साथ ही, यह मशीनें यह भी बताने में सक्षम हैं कि पीएम-10 व पीएम-2.5 बढ़ने की वजह क्या है और इसका स्रोत क्या है। पराली जलने से कितना प्रदूषण बढ़ा है, धूल से कितना प्रदूषण हुआ है, कचरा से कितना प्रदूषण है, कूड़ा चलाने की वजह से कितना प्रदूषण हुआ है, इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए अध्ययन चल रहा है और मार्च में इस सेंटर से प्राथमिक रिपोर्ट सरकार को मिल जाएगी। इसी के आधार पर सरकार कार्य योजना बनाकर काम करेगी।
 

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