Wednesday, Oct 16, 2019
Delhi Environment Protection Act1986 Yamuna DDA NGT BJP Umesh verma

DELHI: यमुना डूब क्षेत्र से हटाई गई 500 झुग्गियां, NGT के आदेश पर DDA ने की कार्रवाई

  • Updated on 10/11/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। यमुना (Yamuna) डूब क्षेत्र में अनधिकृत तरीके से हो रही खेती व बस रही झुग्गियों को हटाने की बड़े स्तर पर डीडीए (DDA) ने कार्रवाई की है। एनजीटी (NGT) के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में भारी संख्या में झुग्गियों को हटाने का हल्का-फुल्का विरोध भी हुआ। लेकिन दस्ते में शामिल आठ बुलडोजर व भारी पुलिस बल भाजपा (BJP) के नेता उमेश वर्मा (Umesh verma) व उनके साथियों के पहुंचने व आला कमान से बात करने के बाद ही वहां से वापस हुआ। भाजपा प्रदेश जेजे सेल प्रभारी उमेश वर्मा अपने कुछ अन्य पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि करीब 500 से अधिक झुग्गियों को हटाया गया है। 

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उमेश वर्मा ने बताया कि बिना किसी पूर्व नोटिस के इस तरह से कार्रवाई कर वहां रहने वाले लोगों को खुले में रहने को मजबूर किया गया है। यदि पहले से नोटिस मिला होता तो निश्चित रूप से लोगों के लिए यह समस्या पेश नहीं आती। उधर, डीडीए अधिकारी ने आरोपों के बाबत कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना के बाढ़ के मैदानों को अतिक्रमणों व अनधिकृत कब्जे से मुक्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह निर्देश भी जारी किया है कि जो भी संबंधित संगठन यमुना डूब क्षेत्र से अनधिकृत कब्जे को हटाने में असफल होगा उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।

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निर्देश डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों को जारी किए हैं। डीडीए फ्लाईओवर के समीप यमुना डूब क्षेत्र में वीरवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई। अधिकारी ने कहा कि अवैध कब्जाधारियों को पहले से ही डूब क्षेत्र को खाली करने के आदेश की जानकारी थी। लेकिन वह बाढ़ के मैदान से नहीं हटे। 

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यमुना डूब क्षेत्र को नो खेती जोन बनाने का लक्ष्य
यमुना डूब क्षेत्र में बढ़ रहे अतिक्रमण व हो रही खेती पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। एनजीटी से लगातार पड़ रही फटकार के बाद अब 2019 के अंत तक इस पूरे क्षेत्र को नो कल्टीवेशन जोन बनाने की तैयारी में संबंधित विभागों को जुटने को कहा गया है। बताया जाता है कि इसके लिए एसटीएफ के नेतृत्व में डीडीए, सिंचाई विभाग सहित अन्य विभाग अब कार्रवाई को तेजी से अमली जामा पहनाने में जुटे हैं।

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दरअसल मंत्रालय के निर्देश पर डीडीए ने पहले ही साफ किया था कि यमुना डूब क्षेत्र में खेती नहीं की जा सकती है। इसके लिए दिल्ली सरकार के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम भी देना था तथा निगरानी के लिए प्राइवेट सुरक्षा कर्मियों व सीसीटीवी लगाए जाने थे। लेकिन यह दावे सब हवाई साबित हुए। ऐसे में मंत्रालय ने एनजीटी से मिले आदेश के बाद अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की योजना बनाई है। डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार दिसंबर 2019 तक तक यमुना डूब क्षेत्र को पूरी तरह से नो कल्टीवेशन जोन के रूप में तब्दील करना है। ताकि यमुना को स्वच्छ बनाने का कार्य किया जा सके। इसके लिए इस क्षेत्र में अनधिकृत तरीके से बस रही झुग्गी बस्ती को भी हटाया जाएगा। 

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कृत्रिम तालाबों से मूर्तियों के अवशेष हटाए निगम, दिल्ली सरकार का आदेश
राजधानी में दुर्गा पूजा और गणपति विसर्जन के बाद अलग-अलग इलाकों में मूर्तियों के विसर्जन के लिए बनाए गए कृत्रिम तालाबों में जमा मूर्तियों के अवशेष दिल्ली की नगर निगमों को हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार इस वर्ष दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के भीतर मूर्ति विसर्जन नहीं करने दिया। विसर्जन के लिए अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे तालाब बनाए और तालाबों में ही मूर्तियों का विसर्जन किया गया।

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इसके बाद अब इन तालाबों के किनारे हजारों मूर्तियों के अवशेषों का अंबार लगा हुआ है। राज्य सरकार ने आज आदेश जारी कर कहा है कि इन मूर्तियों के अवशेषों को हटाने का जिम्मा स्थानीय निकायों का है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने अब निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट-1986 (Environment Protection Act,1986 ) और वॉटर (प्रीवेंशन एंड कंट्रोल आफ पॉल्यूशन) एक्ट-1974 के अंतर्गत 48 घंटे के भीतर विसर्जित की गई मूर्तियों को नदी, झील, तालाब के किनारे से हटाने का जिम्मा नगर निगमों का है। 

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दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत (Kailash Gahlot) ने इस बाबत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए आदेश जारी कर कहा है कि सभी स्थानीय निकाय इन तालाबों से तुरंत प्रभाव से मूर्तियों के अवशेष हटाएं। उन्होने कहा कि इस बाबत कंप्लायंस रिपोर्ट भी आज ही शाम तक दाखिल करें। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति मूर्तियों के अवशेष को हटाने में निगरानी करेगी। 

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