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RRTS और मेट्रो पर तनातनी जारी, दिल्ली सरकार ने जताई नाराजगी

  • Updated on 4/4/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दिल्ली सरकार पर दिल्ली मेट्रो और दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना के बारे में लिखे पत्र पर दिल्ली सरकार ने गहरी नाराजगी जताई है। दिल्ली सरकार ने उक्त पत्र को आधारहीन बताया है।

दिल्ली सरकार ने साफ  किया कि दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना को अनुमति देने के लिए तैयार है। लेकिन दिल्ली सरकार चाहती है कि परियोजना लागत में दिल्ली सरकार का हिस्सा केंद्र सरकार वहन करे। दिल्ली सरकार के पास फंड नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस आशय का पत्र केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेज दिया है।

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आईएसबीटी सराय काले खां के पुनर्विकास को यह मानकर अनुमति दी गई है कि रैपिड मेट्रो का अंडरग्राउंड स्टेशन बन रहा है। आईएसबीटी सराय काले खां के पुनर्विकास के लिए 265 करोड़ की राशि भी इस मद में दिल्ली सरकार ने दे दी है। 

वहीं, दिल्ली मेट्रो द्वारा चौथे फेज का खर्च 46845 करोड़ रुपए तय कर दिया था। इसे दिल्ली कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी। कहा गया है कि दिल्ली सरकार से इस पर बात किए परियोजना लागत को बढ़ाना उचित नहीं है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार इस परियोजना में 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदार है।

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इसलिए परियोजना लागत में वृद्धि से पहले दिल्ली सरकार से पूछा जाना चाहिए था। मेट्रो के चौथे चरण को लेकर दिल्ली सरकार ने कहा कि उसकी ओर से इसमें कोई बाधा नहीं डाली गई है।

परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बयान जारी कर कहा है कि दिल्ली सरकार ने मेट्रो को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 26 मार्च को ही 200 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। 

कहा गया है कि केंद्र ने मेट्रो के चौथे चरण के जिन तीन गलियारों को मंजूरी दी है उसके भूमि अधिग्रहण का जिम्मा दिल्ली सरकार पर डाल दिया गया है जो ठीक नहीं है। 

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गहलोत ने कहा है कि दिल्ली मंत्रिमंडल ने दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के सभी छह गलियारों को मंजूरी दी थी। इसके बाद केन्द्र सरकार ने दिल्ली मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत छह में से तीन गलियारों को मंजूरी दी। इतना ही नहीं इस बारे में दिल्ली सरकार से कोई सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया।  

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