Friday, Jan 28, 2022
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दिल्ली: ऑक्सीजन की कमी से मौत पर मुआवजा समिति को HC की मंजूरी

  • Updated on 9/22/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उसे कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कथित कमी के कारण हुई मौतों की जांच के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा उच्च अधिकार प्राप्त स्तरीय जांच समिति गठित करने में कोई दिक्कत नहीं दिखती है। अदालत समिति गठित करने से संबंधित एक याचिका पर विचार कर रही है।

अदालत ने रेखांकित किया कि दिल्ली सरकार का रुख है कि समिति किसी भी अस्पताल को कोई दोष नहीं देगी और किसी भी मुआवजे का भुगतान किया जाएगा और सरकार अकेले इसे वहन करेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार के अनुसार मुआवजे का निर्धारण करने का मानदंड जांच के लिए खुला होगा और इसका कार्य ऑक्सीजन के आवंटन और उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उप समूह के साथ ओवरलैप नहीं करेगा।

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अनुग्रह राशि देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना जरूरी नहीं- HC
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा उक्त कथन के मद्देनजर हमें जीएनसीटीडी (दिल्ली सरकार) द्वारा गठित एचपीसी को उसकी नियत भूमिका निभाने में कोई आपत्ति नहीं दिखती है। पीठ की यह भी राय है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुग्रह राशि देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

अदालत ने कहा कि 27 मई को समिति गठित करने के संबंध में दिल्ली सरकार द्वारा जारी आदेश की मंशा कोविड-19 के पीड़ितों को अनुग्रह देने की नहीं है। इसका मकसद ऑक्सीजन की कमी के कारण कोविड मरीज मरीज की मौत के संबंध में समिति को मिली हर एक शिकायत का परीक्षण करना है। 

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दिल्ली सरकार ने कहा सत्यमेव जयते
दिल्ली सरकार ने बयान जारी कर कहा कि हम कोर्ट के निर्देश का सम्मान करते हैं और साथ ही साथ आभार भी व्यक्त करते हैं। कहा गया है कि कोरोना वायरस के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत के चलते राजधानी में हुई मौतों को लेकर दिल्ली सरकार शुरू से ही गंभीर है और सरकार चाहती है कि सच सामने आना चाहिए।

सरकार ने कहा कि आश्चर्यजनक है कि इस संबंध में सरकार की ओर से 2 बार भेजी गई फाइल उपराज्यपाल ने रोक दी। दिल्ली सरकार ने कहा कि आखिरकार अदालत ने सरकार के रुख को सही ठहराया है। सत्यमेव जयते!

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