Sunday, Jul 03, 2022
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अब वार्षिक और विकास शुल्क वलूस सकते हैं दिल्ली के निजी स्कूल, HC ने हटाई निदेशालय की रोक

  • Updated on 6/1/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पिछले साल कोरोना को देखते हुए दिल्ली के शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने से प्रतिबंधित कर दिया था। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए साल 2020-21 के शैक्षणिक सत्र का वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने का आदेश दे दिया है। निजी स्कूलों की ओर से एक्शन कमेटी के द्वारा लगाई गई याचिका पर हाईकोर्ट ने ये फैसला लिया है। 

निजी स्कूलों की ओर से एक्शन कमेटी ने जो याचिका लगाई थी उसमें शुल्क वसूली पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार का शिक्षा निदेशालय निजी स्कूलों की फीस तय करने या फीस लेने के मामले में दखल देने का अधिकार नहीं रखता है।

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दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट की धारा 17 की गलत व्याख्या
कोर्ट ने ये भी कहा कि निदेशालय ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट की धारा 17 की गलत व्याख्या की और ये आदेश उसके आधार पर जारी किया। कोर्ट ने कहा कि जब तक स्कूल मुनाफाखोरी के लिए बेतहाशा फीस न बढ़ा रहें हों तब तक निदेशालय फीस के मामले में दखल देने का अधिकारी नहीं है। बता दें कि हाईकोर्ट ने दिल्ली शिक्षा निदेशालय के दो आदेशों को रद्द कर दिया है। एक आदेश 18 अप्रैल और दूसरा आदेश 28 अगस्त 2020 को जारी किया गया था।

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निदेशालय के आदेश से स्कूल के काम पर पड़ रहा असर- हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा है कि भले की कोरोना काल में स्कूल नहीं खुल रहे हों लेकिन इसका वार्षिक और विकास शुल्क से कोई लेना देना नहीं है। निदेशालय ने पिछले साल ये तर्क देते हुए कि स्कूल नहीं खुल रहे हैं इसलिए वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेना चाहिए और इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने कहा है कि निदेशालय के इस आदेश से स्कूलों के काम काज पर असर पड़ रहा है, लिहाजा कोर्ट शुल्क वसूलने का आदेश देता है। 

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