Wednesday, Feb 01, 2023
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एम्स के भ्रष्टाचार मामले अवैध तरीके बंद करने के दावे पर कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

  • Updated on 4/9/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली हाई कोर्ट ने आज एक एनजीओ की याचिका पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से जवाब मांगा है।

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याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कथित तौर पर एम्स के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये के रिश्वतखोरी के मामलों और उनसे जुड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई को सक्षम प्राधिकार- पीएमओ की मंजूरी के बिना अवैध तरीके से बंद कर दिया था। 

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया और याचिका पर 31 जुलाई तक जवाब मांगा।

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एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन’ का दावा है कि नौकरशाहों के खिलाफ एम्स में भ्रष्टाचार के सभी केस, जिनमें 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बुनियादी विकास से जुड़े मामले हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री की मंजूरी के बिना और बगैर उचित प्रक्रिया अपनाए अवैध तरीके से बंद किया जा रहा है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग प्रधानमंत्री के अधीन है। 

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एनजीओ ने एम्स में 2012 से 2014 के दौरान भ्रष्टाचार के कथित खास मामलों में तेज जांच की मुख्य याचिका में आवेदन दाखिल किया है। एनजीओ ने वकील प्रशांत भूषण के जरिए दाखिल अपने ताजा आवेदन में केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की है कि भ्रष्टाचार के मामले सक्षम अनुशासन प्राधिकार को भेजे जाएं।

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