Thursday, Sep 29, 2022
-->
delhi-high-court-dismisses-application-interference-in-hate-speech-petition-of-bjp-leaders-rkdsnt

कोर्ट ने BJP नेताओं के नफरत भरे भाषण संबंधी याचिका में हस्तक्षेप आवेदन किया खारिज 

  • Updated on 2/24/2022

 नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका की विचारनीयता को चुनौती देने वाले आवेदन पर गौर करने से इनकार कर दिया। संबंधित याचिका में कथित रूप से नफरत भरे भाषण देने को लेकर कुछ नेताओं के विरूद्ध जांच की मांग की गयी है जिससे नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरूद्ध प्रदर्शन के आलोक में फरवरी में हिंसा भड़की थी। 

यूक्रेन संकट : भारतीय राजदूत ने फंसे भारतीयों से की धैर्य के साथ करने की अपील

अदालत ने कहा कि वह दखल संबंधी आवेदन को मंजूर नहीं कर रही है और उसने इसे भविष्य के लिए लंबित रखने से भी इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भमभानी की पीठ ने कहा, ‘‘ हम आपको अपना फैसला बता रहे हैं, यह खारिज किया जाता है। आप आवश्यक रूप से या उपयुक्त पक्ष नहीं है। कृपया इसे सर्कस नहीं बनाये। हम इसे लंबित नहीं रख रहे हैं। आपका मुवक्किल बिन बुलाया मेहमान है।’’ 

विपक्ष ने यूक्रेन से भारतीयों को सुरक्षित लाने से जुड़ी सरकार की रणनीति पर खड़े किए सवाल

अदालत शेख मुजतबा फारूक की लंबित याचिका में एक वकील की ओर से दायर हस्तक्षेप आवदेन पर सुनवाई कर रही थी। फारूक ने भाजपा नेताओं--अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने एवं जांच की मांग की है। हस्तक्षेप आवेदन दायर करने वाले आवेदक के वकील पवन नारंग ने कहा कि याचिकाकर्ता फारूक का याचिका दायर करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि, उच्चतम न्यायालय के अनुसार जनहित याचिकाओं के सिलसिले , यदि याचिकाकर्ता पुलिस के पास नहीं गया है, तो उसकी याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए। 

हिंदुओं के खिलाफ BJP विधायक राघवेंद्र के बयान पर AAP ने चुनाव आयोग से लगाई गुहार

वकील ने कहा कि यह जनहित याचिका नहीं बल्कि प्रचार पाने का वाद है। इस पर अदालत ने कहा, ‘‘ आप यह कहने वाले कौन हैं? आप संबंधित पक्ष नहीं हैं। यह याचिकाकर्ता के लिए प्रचार पाने का है या आपके लिए , हम नहीं जानते। हम उच्चतम न्यायालय के फैसले से अवगत हैं। हम आपको दखल नहीं देने दे रहे है। हमें पता है कि जनहित याचिका का दायरा क्या है।’’ 

रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग     

अदालत ने कहा, ‘‘ यहां स्थिति की विडंबना देखिए कि हस्तक्षेपकर्ता अर्जी दायर करता है कि याचिका विचारयोग्य नहीं है। लंबित याचिका में अवरोध पैदा करने की अनुमति देने का सवाल ही नहीं है। यदि याचिकाकर्ता का अधिकार क्षेत्र नहीं है तो हस्तक्षेपकर्ता को भी इस परिदृश्य में , इसके आसपास भी नहीं होना चाहिए।’’  उसके बाद नारंग ने आवेदन वापस लेने की अनुमति मांगी और पीठ ने मंजूरी दे दी।       

विधानसभा चुनाव के रिजल्ट से ठीक पहले अहमदाबाद में होगी RSS की प्रतिनिधि सभा की बैठक 

comments

.
.
.
.
.