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कोरोना संकट: दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश- प्लाज्मा देने के लिए नहीं कर सकते मजबूर

  • Updated on 7/4/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को कोविड-19 के ठीक हुए मरीजों से घर पर या अस्पताल में प्लाज्मा के लिए जाने को अनिवार्य बनाने का निर्देश देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि जनहित याचिका को अभिवादन के रूप में लिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को वचन देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता और यह स्वैच्छिक होना चाहिए। अदालत ने प्रतिभागियों, केंद्र, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विभिन्न निकायों से कहा कि वह जनहित याचिका को अभिवेदन के रूप में लें। 

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प्लाज्मा दान करने के लिए बाध्य करने की याचिका
जिसमें प्लाज्मा की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तय किए जाने और एक संवैधानिक इकाई के गठन का आग्रह किया गया है। याचिका में दावा किया गया था कि कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए प्लाज्मा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के वास्ते केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसमें यह भी आग्रह किया गया था कि कोविड-19 के ठीक हुए प्रत्येक मरीज के लिए पहली बार में ही यह बाध्य कर दिया जाना चाहिए कि वह प्लाज्मा दान करें।

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ये लोग कर सकते हैं प्लाज्मा दान
बता दें कि दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल को प्लाज्मा बैंक बनाया गया है। ये देश का पहला प्लाज्मा बैंक है। प्लाज्मा बैंक में पहले दिन 10 डोनर और 3 रिसीवर सामने आए हैं। प्लाज्मा थेरेपी के जरिए दिल्ली कोरोना से जंग करने की रणनीति बना चुकी है।  प्लाज्मा दान वही कर सकता है जो एक बार कोरोना संक्रमित हुआ हो और उससे ठीक हो चुका हो। ठीक होने के 14 दिन बाद ही प्लाज्मा दान किया जा सकता है।

इसके अलावा 18-60 साल की बीचे के उम्र के लोग ही प्लाज्मा दान कर सकेंगे। प्लाज्मा दान करने के लिए 50 किलो भार होना जरूरी है। कोई भी महिला जो एक बार गर्भवती हो चुकी हो वो प्लाज्मा दान नहीं कर सकती। इसके अलावा शुगर के मरीज, हाइपर टेंशन के मरीज, किडनी या लिवर की बीमारी से ग्रसित लोग, कैंसर सर्वाइवर भी प्लाज्मा दान नहीं कर सकेंगे।

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