Sunday, Apr 18, 2021
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delhi high court said downloading whatsapp is not mandatory sohsnt

WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी पर दिल्ली HC का बड़ा बयान, कहा- ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं

  • Updated on 1/25/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। व्हाट्सएप (WhatsApp) की नई प्राइवेसी पॉलिसी (Privacy Policy) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार के कहा कि मोबाइल में व्हाट्सएप डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं है, यह स्वैच्छिक है। कोर्ट ने केंद्र से कहा कि यह चिंता का एक गंभीर मामला है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए ऐप द्वारा एकतरफा बदलाव किया गया है। इस पर केंद्र ने अपनी बात रखते हुए कहा कि व्हाट्सएप नई प्राइवेसी पॉलिसी के संबंध में भारतीय यूजर्स और यूरोपयी यूजर्स के साथ अलग-अलग नियमों पर काम कर रहा है, जोकि चिंता का बात है।

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इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि व्हाट्सएप की नई निजता नीति स्वीकार करना स्वैच्छिक है और यदि कोई इसकी शर्तों एवं नियमों से सहमत नहीं है, तो वह इसका इस्तेमाल नहीं करने का विकल्प चुन सकता है। पेशे से वकील एक याचिकाकर्ता ने व्हाट्सएप की नई निजता नीति को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा, यह एक निजी ऐप है। इसमें शामिल नहीं हों। यह स्वैच्छिक है, इसे स्वीकार नहीं कीजिए। किसी और ऐप का इस्तेमाल कीजिए।   

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मोबाइल ऐप की शर्तें एवं नियम हैरान करने वाली
अदालत ने कहा कि यदि मोबाइल ऐप की शर्तें एवं नियम पढ़े जाएं, तो अधिकतर ऐप के बारे में आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आप किन बातों पर सहमति जता रहे हैं। अदालत ने कहा, यहां तक कि गूगल मैप्स भी आपके सभी डेटा को एकत्र करता है। उसने कहा कि इस मामले पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है, इसलिए समय के अभाव के कारण इस मामले को 25 जनवरी यानी आज के दिन के लिए सुनवाई को टाल दिया गया था। केंद्र सरकार ने भी अदालत की इस बात पर सहमति जताई कि इस मामले के विश्लेषण की आवश्यकता है।      

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व्हाट्सएप की ओर से कही गई थी ये बात
व्हाट्सएप और फेसबुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसमें उठाए गए कई मुद्दों का कोई आधार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों एवं मित्रों के बीच निजी बातचीत कूट रहेगी और उसे व्हाट्सएप एकत्र नहीं कर सकता तथा नई नीति में यह स्थिति नहीं बदलेगी।     

वकीलों ने कहा कि नीति में बदलाव से व्हाट्सऐप पर कारोबारी बातचीत ही प्रभावित होगी। याचिका में कहा गया है कि निजता की नई नीति संविधान के तहत निजता के अधिकारों का हनन करती है। याचिका में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप की निजता संबंधी नई नीति उपयोगकर्ता की ऑनलाइन गतिविधियों पर पूरी पहुंच की अनुमति देती है और इसमें सरकार की कोई निगरानी नहीं है। नई नीति के तहत उपयोगकर्ता या तो इसे स्वीकार करता है या ऐप से बाहर हो जाता है, लेकिन वे अपने डाटा को फेसबुक के स्वामित्व वाले दूसरे मंच या किसी अन्य ऐप के साथ साझा नहीं करने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं।

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जानें कब तक के लिये टला  नई प्राइवेसी पॉलिसी बदलाव
बता दें कि व्हाट्सएप इन दिनों अपने सिक्योरिटी पॉलिसी को लेकर खुब चर्चा में बना हुआ है, व्हाट्सएप ने अपने नीति में बदलाव (अपडेट) को 15 मई तक के लिए टाल दिया है। अपने हालिया निजता नीति बदलावों को लेकर व्हाट्सएप को भारत सहित वैश्विक स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दुनियाभर में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि व्हाट्सएप उपयोक्ताओं के डेटा को अपनी मूल कंपनी फेसबुक से साझा कर सकती है। यह घटनाक्रम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि भारत व्हॉट्सएप के लिए सबसे बड़े बाजारों में से है। भारत में व्हॉट्सएप के प्रयोगकर्ताओं की संख्या 40 करोड़ से अधिक है।  

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