दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन ने लगातार तीसरे दिन भी रुलाया, अटक-अटक कर चली

  • Updated on 12/7/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (DMRC) की ब्लू लाइन मेट्रो पर आई तकनीकी खराबी पर कंट्रोल कर लिया गया है लेकिन अभी भी रफ्तार स्लो है जिसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीसरे दिन भी ब्लू लाइन पर मेट्रो अटक-अटक कर चल रही है। 

इस बारे में दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने कहा कि हमारी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। इसलिए जब भी सिस्टम में कोई खराबी आती है, तो ट्रेनों को ऑटोमैटिक नहीं चलाया जाता। मैनुअल तरीका अपनाया जाता है।

रॉबर्ट वाड्रा और उनके करीबियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की टीम के छापे

मैनुअली चलाने में ट्रेनों की स्पीड कम हो जाती है, दिक्कतें आती हैं। बुधवार को आई खराबी की वजह से ब्लूलाइन पर 786 मेट्रो ट्रिप में से 16 कैंसल करने पड़े। 20 ट्रिप डिले हुए। गुरुवार की शाम तक द्वारका-नोएडा रूट पर ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम पूरी तरह ठीक हो गया था।

3 मिनट 30 सेकंड की फ्रीक्वेंसी पर ट्रेनें चलाई जा रही थीं। ब्लूलाइन पर 17 जगह इंटरलॉकिंग पॉइंट्स हैं, जिसके जरिए कंट्रोल रूम को ट्रेनों के सिग्नल मिलते हैं। इनमें से आठ मेन इंटरलॉकिंग पॉइंट्स हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि सिग्नल सिस्टम के सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आई थी। यह सॉफ्टवेयर जर्मन कंपनी सीमंस ने बनाया था। 

रॉबर्ट वाड्रा और उनके करीबियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की टीम के छापे

उन्होंने कहा, बुधवार को जब सिस्टम में खराबी आनी शुरू हुई, तो फौरन उसे ठीक करने के लिए सभी 17 इंटरलॉकिंग पॉइंट्स पर 17 टीमें भेजी गईं। सॉफ्टवेयर सिस्टम को रीबूट करके उसे ठीक करने का काम किया गया। हमने सिग्नल सिस्टम के सॉफ्टवेयर में आई खराबी और उसके बार-बार चालू और बंद होने का रिकॉर्ड जमा किया है। उसे जर्मन कंपनी सीमंस को भेजा जाएगा। वे ही पता लगाएंगे कि सॉफ्टवेयर में यह खराबी कैसे आई और इसे ठीक करने के लिए क्या करना होगा। 

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