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delhi on high flood alert river yamuna crosses the warning mark

दिल्ली: मंडरा रहा बाढ़ का खतरा! 207.08 मीटर पर आज पहुंच जाएगी यमुना

  • Updated on 8/21/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली (Delhi) में यमुना (Yamuna) खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और मंगलवार शाम तक जलस्तर (Water level) 206.36 मीटर पर पहुंच गया। उम्मीद की जा रही है कि बुधवार दोपहर तक जलस्तर 207.08 मीटर तक पहुंच सकता है। उत्तर रेलवे (Railway) ने लोहे के पुल से रेल यातायात बंद कर दिया गया है और अब रेलगाडिय़ों को दिल्ली जंक्शन से शाहदरा के बीच वैकल्पिक रास्ते से चलाया जाएगा। निचले इलाकों से मंगलवार को भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया। राहत कार्य में जुटे लोगों ने करीबन 12 हजार लोगों को अब तक अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। 

हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला आज भी जारी 
मंगलवार सुबह जलस्तर 205.90 मीटर पर पहुंच गया जो खतरे के निशान से 0.61 मीटर ज्यादा रहा और शाम होते होते यह बढ़कर 1.53 मीटर हो गया और अब बुधवार तक यह बढ़कर 2.53 मीटर होने के आसार हैं। एक दिन में ही 1.53 मीटर पानी बढऩे के बाद निचले इलाकों में पानी भरने के बाद पल्ला, वजीराबाद गांव, यमुना बाजार, कुदसिया घाट, हाथी घाट, उस्मानपुर से लेकर ओखला तक निचले इलाकों में रह रहे लोगों को बाहर निकाला गया। निचले इलाकों में रह रहे लोगों को दिल्ली सरकार की अलग-अलग एजेंसियों द्वारा बनाए गए दो हजार से अधिक टेंटों में भेजा गया है। मंगलवार को किसान कॉलोनी और यमुना खादर में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई झुग्गी बस्तियां डूब चुकी हैं। केंद्रीय जल आयेाग के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा से अब तक कई लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। दिल्ली यातायात पुलिस ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ऐहतियातन लोहे के पुल पर यातायात बंद कर दिया है और रेलवे भी निगरानी रख रहा है। उत्तर रेलवे के अनुसार रेलगाडिय़ों को धीमी गति से चलाया जा रहा था लेकिन देर शाम पानी बढऩे के बाद रोकने का फैसला लिया गया।      

यमुना खादर का इलाका कराया जा रहा खाली
यमुना से सटे निचले हिस्से में बाढ़ के कारण वहां रह रहे लोगों को हटाया जा रहा है। हालांकि, इसमें मुश्किलें भी सामने आ रही हैं। किसी तरह की अनहोनी नहीं हो इसके लिए, बचाव दल की तैनाती चौबीसों घंटे की गई है पूर्वी दिल्ली के डीएम के महेश ने बताया कि एसडीएम, जिला प्रशासन के अधिकारियों, सिविल डिफेंस वालिंटियर्स, जिला आपदा प्रबंधन के कर्मचारी बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात किए गए हैं और राहत कार्यों के लिए कुल 53 बोट तैयार हैं, जबकि जिन 30 स्थानों पर बाढ़ का ज्यादा असर की संभावना है, वहां एक-एक नाव पहले ही तैनात हैं। सरकार ने मयूर विहार एक्सटेंशन के पास चिल्ला गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए टेंट्स लगाए हैं। मंगलवार को पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में ही करीबन 80 टेंट लगाए गए। इसके साथ ही दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से मोबाइल शौचालय भी लगाए जा रहे हैं। पीड़ितों के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई है। 

बचाव के लिए 24 घंटे दस्ते हैं तैनात
इससे पहले 1978 के बाद 2013 में हरियाणा ने 8.1 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा था, जिससे यमुना का जलस्तर 207.3 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि 2010 में 2017.11 मीटर तक पानी पहुंच चुका था। हालंाकि 2010 अथवा 2013 में अधिक लोग प्रभावित नहीं हुए थे। प्रभावित इलाकों में प्रशासन के अधिकारियों ने जब लोगों से सुरक्षित स्थानेां के लिए कहा तो लोग भड़क गए। जानकारी के अनुसार, उस्मानपुर पहला पुश्ता यमुना खादर में अभी भी कुछ लोग हैं जो राहत शिविरों में जाने को तैयार नहीं है। प्रशासन के लोग लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे बाढ़ प्रभावित इलाकों को छोड़कर राहत शिविर में चले जाएं लेकिन वे मान नहीं रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों से जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकते, क्योंकि अगर यह लोग भड़क गए तो स्थिति बिगड़ सकती है। इन लोगों को इस बात का डर है कि इनकी जगह पर कोई दूसरा व्यक्ति कब्जा न कर ले या सरकार जगह खाली न करवा ले। ऐसे में कुछ लोग शिविरों में आकर भोजन करके वापस खादर के इलाकों में पहुंच रहे हैं।

दीवार से ठहरी यमुना, रिंग रोड पर बहने को बेकरार
विशेष बात यह है कि यमुना बाजार इलाके में लगभग 9-10 फीट की लंबी दीवार ने बाढ़ के पानी को रोक रखा है अन्यथा अगर दीवार न होती तो यमुना में आई बाढ़ का पानी रिंग रोड तक पहुंच जाता। रिंग रोड पर पानी आने के बाद स्थिति और काफी भयावह हो जाती। रिंग रोड ही नहीं, आसपास के क्षेत्र व कश्मीरी गेट स्थित बस अड्डा को भी बाढ़ अपनी चपेट में ले सकता था। यमुना बाजार में जबसे यह दीवार बनी है तबसे बाढ़ का पानी दीवार को पार नहीं किया है। 

तबाही देने वाली नदी को इंजीनियर ने कर दिया लापता
दिल्ली के गांवों में नाक तक पानी, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी वालों को अपने घरों की छत पर रात बितानी पड़ी। 1978 में यह तस्वीर यमुना और साहिबी के उफान से बनी, लेकिन उसके बाद एक इंजीनियर ने साहिबी को ही दिल्ली में इतिहास बना दिया। राजस्थान से चल कर हरियाणा होते हुए दिल्ली के ढांसा से राजधानी पहुंचने वाली साहिबी नजफगढ़ झील में करीबन 120 वर्ग किलोमीटर में फैल जाती और नजफगढ़ नाले में मिलकर यमुना में समाप्त होती। 

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जहांगीरपुरी, निरंकारी कालोनी, मॉडल टाउन के अलावा बाहरी दिल्ली के करीबन दो दर्जन गांवों में पांच-पांच फुट पानी भरने के बाद हजारों हेक्टेयर में फसल भी बर्बाद हो गई। राजस्थान, हरियाणा में भी साहिबी ने 1978 में जमकर तबाही मचाई। साहिबी नजफगढ़ झील से आगे नजफगढ़ नाले के जरिए 57 किलोमीटर दिल्ली में होते हुए 10.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बहती और फिर यमुना में मिल जाती। ‘वर्ष 1977 में जब भयंकर बाढ़ आई तो राजस्थान भी प्रभावित हुआ और यह आलम उसकी कुल करीबन 300 किलोमीटर लंबाई में आने वाले हर शहर का हुआ। वर्ष 1978 में मुझे इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद मुझे सीधा इस नदी के सर्वे काम दिया गया। 

बाढ़ से निपटने का नहीं है कोई प्लान
नदी का सर्वे करके नदी पर जगह जगह  मिट्टी के बांध बनाने का प्रस्ताव दिया। राजस्थान सरकार ने इसे मान लिया और इससे पानी रुका और आसपास सिंचाई भी होने लगी। इसके बाद फिर राजस्थान साहिबी नदी और नजफगढ़ नाले में इतना पानी नहीं आया और न ही दिल्ली में बाढ़ आई।’ बाढ़ एवं नियंत्रण विभाग के पूर्व प्रमुख व केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्व अतिरिक्तमहानिदेशक एमसीटी परेवा यह बताते हुए कहते हैं कि हरियाणा सरकार द्वारा इस पानी को बचाने, बाढ़ से निपटने के लिए जयपुर दिल्ली हाईवे पर मसानी गांव में मसानी बैराज बनाना शुरू किया गया, लेकिन योजना फेल हो गई। रेवाड़ी, धारूहेड़ा के पास इस बैराज से साहिबी नदी के पानी को हरियाणा में रोकना था ताकि बाढ़ न आए और सिंचाई के लिए इस्तेमाल भी हो सके लेकिन फिर इस नदी में पानी नहीं आया और अब यह दिल्ली में गुम हो चुकी है। 

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