Monday, Mar 01, 2021
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JNU हिंसा में दिल्ली पुलिस को मिली 'क्लिन चिट', लगे थे ये गंभीर आरोप

  • Updated on 11/19/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जनवरी महीने में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुए हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट मिल गई है। जनवरी के पहले सप्ताह में हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे। बताया जा रहा था कि जिस समय कैंपस में हिंसा हुई, उस समय दिल्ली पुलिस कैंपस के बाहर ही खड़ी थी। लेकिन वह अंदर नहीं गई। 

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हिंसा की खबरें सामने आई
हालांकि, पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों की अनुमति उसके पास नहीं थी, इसलिए वह कैंपस में दाखिल नहीं हुई। बता दें कि कैंपस में 3 जनवरी से लेकर 5 जनवरी तक हिंसा की खबरें सामने आई थी। कैंपस में दाखिल हुए करीब 100 नकाबपोश लोगों जमकर उत्पात मचाया था।

ईंट फेंके, हॉस्टलों में घुसकर छात्रों को पीटा
जेएनएयू का दावा है कि मास्क पहने हुए एबीवीपी के सदस्य कैंपस में लाठी, रॉड और हथौड़े लेकर घूम रहे थे। उन्होंने ईंट फेंके, हॉस्टलों में घुसकर छात्रों को पीटा। छात्रों के साथ-साथ कई टीचरों को भी पीटा गया है।

वहीं घोष पर बर्बर हमला हुआ है जिसके कारण उनके सिर से खून बह रहा था। जेएनयूएसयू ने दावा किया कि बाहरीयों को कैंपस में घुसने दिया गया हमलावरों ने गर्ल्स हॉल्टल में घुसकर छात्रों को पिटा।

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एबीवीपी का दावा
छात्रों के आरोप पर एबीवीपी का दावा है कि लेफ्ट के छात्र संगठनों एसएफआई, एआईएसए और डीएसएफ से जुड़े छात्रों ने उनके सदस्यों को बुरी तरह पीटा है। एबीवीपी का दावा है, हमले में करीब 25 छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। 11 छात्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे कहां हैं। लेफ्ट के गुंडों ने हॉस्टलों में घुसकर तोड़फोड़ की।

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90 से ज्यादा बार पुलिस को कॉल
दरअसल जनवरी में को हुए हिंसक हमले में करीब 200 हमलावरों ने साबरमती हॉस्टल समेत कई बिल्डिंग में जमकर तोड़फोड़ की। जिसमें छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष समेत 25 से ज्यादा छात्र और टीचर गंभीर रूप से घायल हुए।

बताया जा रहा है कि रजिस्ट्रार की सलाह पर स्टूडेंट्स ने 100 नंबर पर करीब 90 से ज्यादा बार कॉल किया स्टूडेंटिस का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस देरी से पहुंची और कार्रवाई करने के बजाय चुप रही। 

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