Saturday, Dec 07, 2019
delhi pollution know today aqi 16 november 2019

Delhi Pollution: 5 करोड़ टन धुआं बना रहा है बीमार, जानें आज का AQI

  • Updated on 11/16/2019

नई दिल्ली/ अनिल सागर। दिल्ली में दमघोंटू प्रदूषण में स्थानीय कारणों के बाद पराली प्रदूषण की मुख्य वजह है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बाहरी इलाकों में हर साल पांच करोड़ टन कृषि अवशेष जलाए जाते हैं। सर्दियों में इस आग से होने वाले प्रदूषण से अस्पतालों में 20 प्रतिशत तक रोगी बढ़ते हैं और 1.49 करोड़ लोग हर साल रोगियों जैसी हालत में जीने पर मजबूर हो जाते हैं। राज्य सरकारें 10 प्रतिशत मामलों में किसानों को जुर्माना, सजा देने की औपचारिकता जरूर निभा रही हैं लेकिन पराली पूरे उत्तर भारत के लिए गंभीर समस्या है। पड़ोसी राज्यों में पराली के वैकल्पिक उपयोंगों सहित विभिन्न आंकलन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय की कई टीमें भी खेतों की खाक छान रही हैं। 
 

एक्यूआई के आंकड़ों के अनुसार आज प्रमुख प्रदूषक पीएम 2.5 और PM10, 500 पर रहा।

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मुआवजे पर 20 हजार करोड़ खर्च 
सरकारी खरीद, सब्सिडी को नगण्य बताने वाले दर्जनों किसान सरकारी योजनाओं को व्यवहारिकता से दूर मानते हैं और एनटीपीसी तक ले जाने की लागत खरीद से अधिक बताते हैं। सब्सिडी अबूझ पहेली जैसी है, तो वहीं कंपनियों की खरीद भी कागजी है। किसानों को प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देकर पराली जलने से रोकी जाए? क्या एक लाख रुपए तक मुआवजा दिया जाए? ऐसे कई सवाल कृषि मंत्रालय व राज्य सरकारों के सामने हैं। जानकार मानते हैं कि एक लाख रुपए के हिसाब से भुगतान करें तो लगभग 20 हजार करोड़ रुपए खर्च आएगा जो कि शहरी प्रदूषण से होने वाले नुकसान, लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च से कहीं कम होगा। हालांकि इस पर अब बहस जरूर शुरू हो चुकी है कि आखिर इसके स्थायी हल के लिए क्या कदम उठाए जाएं। 

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विशेषज्ञों के मुताबिक क्या किया जाए 

  • हैप्पी सीडर को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • राज्य केंद्रीय संस्थानों द्वारा एकत्रीकरण, संग्रह को अनिवार्य किया जाए और कृषि उपकरणों के लिए विशेष क्रेडिट लाइन योजना बनाई जाए।
  • एक बाजार बनाया जाए ताकि थर्मल पावर स्टेशनों, स्थानीय उद्योगों और होटलों, ढाबों में इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
  • फसल अवशेषों के ब्रिकेट को ईंधन के रूप में परिवर्तित कर बागवानी उत्पादन और मिल्क  चिलिंग एप्लिकेशन्स के लिए विकेन्द्रीकृत कोल्ड स्टोरेज को चलाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। 
  • टेरी ने सुझाव दिया है कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस को एक निश्चित कोटा के तहत पटाखे खरीदने चाहिए। टेरी ने 2019 में बेचे जाने वाले पटाखों की 20 प्रतिशत बिक्री की अनुमति देने की सलाह दी है।
  • थर्मल पावर प्लांट में अधिसूचित उत्सर्जन मानकों का पालन करना चाहिए और कोयले के बजाय कृषि अवशेष मिश्रण का उपयोग करें नहीं तो इन्हें पांच महीने की सर्दियों में बंद कर दिया जाए।
  • देशभर में एक करोड़ और एनसीआर में 16 लाख घर अभी भी फसल अवशे्ष से चूल्हों पर निर्भर हैं इन्हें एलपीजी दी जाए। सर्दियों के मौसम में 6 लाख गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को दो मुफ्त सिलेंडर दिए जाएं। इससे पांच प्रतिशत तक प्रदूषण के हिस्से को कम कर सकते हैं।


पराली के बदले मुआवजे को नकार नहीं सकते लेकिन दीर्घकालिक उपाय यह नहीं है। क्योंकि फिर अवशेष जलाकर यह मांग बिहार, यूपी, छत्तीसगढ़ सहित सभी धान पैदावार वाले राज्यों में किसान करेंगे। हां, मुआवजा देकर सही फसल, खेती के पर्यावरण हितैषी तौर तरीकों के लिए प्रोत्साहित जरूर किया जाए। पंजाब विशेषकर फसलों के तौर तरीके बदले, उसे सब्सिडी दी जाए।’ -चंद्रभूषण, पराली शोधार्थी, सीईओआई फॉरेस्ट 


 

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