Monday, Nov 29, 2021
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सफरनामा 2020: लॉकडाउन में सांस लेने लगी थी दिल्ली! जानें प्रदूषण में सालभर कैसे हुआ उतार-चढ़ाव

  • Updated on 12/25/2020

नई दिल्ली/कामिनी बिष्ट। साल 2020 में जहां एक ओर कोरोना (Coronavirus) के चलते इंसानी कौम घरों में कैद होने के लिए मजबूर हो गई, वहीं प्रकृति मुस्कुराने लगी। सालों से प्रदूषण (Pollution) के जहर से जूझती दिल्ली की सांसे लौटने लगी, सर पर नीला आसमान दिखने लगा, काली पड़ चुकी यमुना का पानी निर्मल होकर कल-कल बहने लगा। महामारी के दौर में दिल्ली ने स्वच्छ हवा और स्वच्छ वातावरण में सांस लेने का अनुभव प्राप्त किया। हालांकि ये ज्यादा दिन नहीं रहा। 

कोरोना लॉकडाउन के कारण देश की आर्थिक हालत बिगड़ती चली गई। लॉकडाउन के कारण बाजार, दुकानें, फैक्ट्रियां, कार्यालय, बस, ट्रेन, हवाई यात्रा सब कुछ बंद पड़ गया था। देश में आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जिससे लोग घर से बाहर न निकलें और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। 

इससे देश को भले ही आर्थिक नुकासन हुआ, लेकिन इंसानों द्वारा प्रकृति को दिए गए घाव भरते नजर आए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान 79 प्रतिशत तक प्रदूषण कम हो गया था। लेकिन देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए कोविड से बचने के लिए नियम बनाए गए और जून से देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई। चरणबद्ध तरीके से सब कुछ खुलने लगा और एक बार फिर से इंसान घरों से बाहर थे और प्रकृति चोटिल। 

विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के निष्कर्षों के अनुसार अन्य शहरों में पीएम 2.5 का स्तर प्रारंभिक लॉकडाउन चरण में 45-88% कम हो गया और खुलने पर 2-6 गुना प्रदूषण की वृद्धि देखी गई, दिल्ली में दोनों में सबसे तेज गिरावट और तेज बढ़ोतरी देनों को मिली। एक अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली-एनसीआर में, प्रदूषण में कमी लाने वाले प्रमुख कारकों में से एक, पूर्व-लॉकडाउन महीनों दिसंबर-जनवरी की तुलना में अप्रैल के दौरान राजधानी में प्रवेश करने वाले ट्रकों और वाणिज्यिक वाहनों में 97% की कमी और कुल ट्रैफिक में 91% की कमी थी।

वहीं जब देश में सभी आर्थिक गतिविधियां पूर्ववत चलने लगीं और दिल्ली में ठंड ने दस्तक दी तो एक बार फिर से दिल्ली का दम फूल गया। प्रदूषण का स्तर खराब से बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में जा पहुंचा। केंद्र सरकार दिल्ली सरकार और अन्य एजेंसियों को नोटिस भेजने का काम करती रही।

वहीं दिल्ली सरकार ने इस बार पराली के घुएं से बचाने के लिए पूसा की सहायता से दिल्ली के किसानों को रासयानिक घोल तैयार करके दिया जिससे पराली खेत में ही गल जाएगी और किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि पड़ोसी राज्यों में जलने वाली पराली ने दिल्ली में इस बार भी खूब प्रदूषण किया। दिल्ली सराकर ने अन्य राज्यों से पराली जलने से रोकने के लिए कदम उठाने की अपील की, इसके बाद भी पंजाब, हरियाणा और यूपी के सैकड़ों इलाकों में प्रतिदिन पराली जलाने की घटनाएं सामने आती रहीं। 

केंद्र सरकार का कहना था कि दिल्ली में होने वाला प्रदूषण में पराली का योगदान बहुत ही नग्णय है, जबकि वाहनों के धुएं और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण बढ़ता है। इस बीच दिल्ली सरकार ने लोगों को जागरुक करने के लिए और दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' का अभियान चलाया। आम आदमी पार्टी के कई नेता और स्वंयसेवी सड़कों पर उतरकर लोगों को सिग्नल पर रेड लाइट के दौरान फूल देकर गाड़ी बंद करने की अपील करते नजर आए। हालांकि इस बार दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन नियम को लागू नहीं, किया। फिलहाल दिसंबर के महीने में दिल्ली ठंड और प्रदूषण दोनों की मार झेल रही है। 

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