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delhi riots 2020 its a devastating situation

अपनी तबाही और बर्बादी का मंजर देख खून के आंसू बहा रही दिल्ली

  • Updated on 2/29/2020

अब जबकि दिल्ली के उपद्रव ग्रस्त इलाकों में स्थिति सामान्य की ओर बढ़ रही है, मृतकों और घायलों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। नवीनतम समाचारों के अनुसार वहां मौत का आंकड़ा 47 तक पहुंच गया है जबकि घायलों की संख्या 250 से अधिक बताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस की शुरूआती जांच के अनुसार इन उपद्रवों में कम से कम 82 लोगों को गोलियां लगीं। हर तीसरा व्यक्ति गोली लगने से घायल हुआ और एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया।

पुलिस को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से 350 चले हुए कारतूसों के अलावा तलवारें और विस्फोटक भी मिले हैं। जहां अनेक लोग लापता हैं वहीं अनेक मृतकों के परिजन 4-4 दिनों से अपने प्रियजनोंकी लाशों के लिए भटक रहे हैं।

एक मोटे अनुमान के अनुसार 24 से 26 फरवरी के बीच इन दंगों में कम से कम 79 मकान, 52 दुकानें, 5 गोदाम, 4 मस्जिदें, 3 कारखाने, 2 स्कूल और दोपहियों सहित 500 से अधिक वाहन जला दिए गए। दिल्ली अग्निशमन सेवाओं को 24 से 27 फरवरी सुबह 8 बजे तक लूटमार और आगजनी से बचाव के लिए 218 फोन आए।

इस बीच भाजपा की गठबंधन सहयोगी शिअद के सांसद नरेश गुजराल ने आरोप लगाया है कि 'मैंने पुलिस से अल्पसंख्यक समुदाय के 16 लोगों की सहायता करने को कहा था परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब एक सांसद की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती तो अनुमान लगाया जा सकता है कि आम आदमी के साथ क्या होता होगा।'

27 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के विरुद्ध घृणा भाषण देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली अनेक याचिकाएं दायर की गईं।

दूसरी ओर भाजपा की गठबंधन सहयोगी लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने (भड़काऊ भाषण देने वाले) अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की भाजपा नेताओं से अपील की है परंतु नेताओं की बयानबाजी अब भी लगातार जारी है।

बहरहाल इन उपद्रवों में जहां 2 समुदायों के लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे थे वहीं आपसी भाईचारे व सद्भावना और हिन्दुओं तथा मुसलमानों द्वारा एक-दूसरे की रक्षा करने के भी उदाहरण देखने को मिले हैं। उपद्रवी भीड़ द्वारा बृजपुरी में जलाई गई मस्जिद से मात्र 100 मीटर दूर एक मंदिर की मुसलमानों ने हिन्दुओं के साथ मिलकर रक्षा की।

अनेक मुसलमान परिवारों ने हिन्दुओं के घरों में शरण लेकर जान बचाई और दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी पीड़ितों के लिए राहत कैंप और लंगर लगाने के साथ-साथ उन्हें दवाइयां उपलब्ध करवा रही है।

यह इस बात का प्रमाण है कि नफरतों की आंधियों के बीच भाईचारे के चिराग हमारे देश में सदा से रोशन चले आ रहे हैं और आगे भी रोशन रहेंगे।

परंतु इस समय तो हालत यह है कि आज अपने लाडलों की मौत और अपनी छाती पर दिए गए घावों से लहूलुहान दिल्ली अपनी तबाही और बर्बादी के मंजर देख कर खून के आंसू बहा रही है और अगर बोल सकती तो शायद यही कहती :

खून-खाक का खेल खेलने वालो खुद को संभालो,
हो सके अगर जो तुमसे, तो मुझको बचा लो।

—विजय कुमार 

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