Saturday, Feb 27, 2021
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SDMC: मोबाइल टावरों को मिलेंगे अब ऑनलाइन लाइसेंस 

  • Updated on 11/2/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली (Delhi) में मोबाइल टावरों को अब ऑनलाइन लाइसेंस मिलेंगे। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने सभी नगर निगमों की नोडल एजेंसी होने के नाते, ऑनलाइन प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए मोबाइल टावरों को लाइसेंस जारी करने के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किया। 

नए आवेदकों के साथ-साथ पुराने मोबाइल टावर भी होंगे शामिल
एसडीएमसी का दावा है कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को विकसित करने का उद्देश्य मोबाइल टावरों को अनुमति देने की प्रक्रिया को योजनाबद्ध, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाना है। एसडीएमसी के अनुसार इस प्रणाली में नए आवेदकों के साथ-साथ पुराने मोबाइल टावर भी शामिल हो सकेंगे। इस प्रक्रिया के तहत टेलिकॉम टावर सेवा प्रदाता स्वयं को एसडीएमसी या संबंधित निगम के साथ पंजीकरण करा सकते हैं और मोबाइल टावर लगाने व चलाने का लाइसेंस लेने की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।

ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त होंगे लाइसेंस
इस ऑनलाइन प्रणाली को बहुत ही सरल, पारदर्शी और पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। इस प्रक्रिया में निगम के अधिकारी और जनता के बीच कोई भी व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता नहीं रहेगी और कार्यालयों में भी चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पंजीकृत टावर सेवा प्रदाता ऑनलाइन आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से अपना लाइसेंस प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

इस प्रक्रिया में टेलिकॉम कंपनी को पहले एसडीएमसी या संबंधित नगर निगम से पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद भवन विभाग उनके आवेदन को स्वीकृत करेगा। आवेदन के अनुमोदन के बाद टेलिकॉम कंपनी को विभाग के द्वारा ईमेल प्राप्त होगा और टेलिकॉम कंपनी निगम के पोर्टल पर लॉगिन कर पाएगी। 

दस्तावेजों की जांच करेगा विभाग
आवेदन करने के बाद टेलिकॉम कंपनी (Telecom Company) को टॉवर पंजीकरण कराने के लिए 1000 रुपए का भुगतान करना होगा। संबंधित विभाग टॉवर लगाए जाने वाली साइट का निरीक्षण कर, संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगा और पोर्टल पर निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड करेगा। विभाग द्वारा अंतिम अनुमोदन दिए जाने के बाद टेलिकॉम कंपनी को लाइसेंस शुल्क के भुगतान के लिए सूचित किया जाएगा और भुगतान करने के बाद ऑनलाइन सिस्टम के द्वारा लाइसेंस प्राप्त किया जा सकेगा जो कि क्यूआर कोड सक्षम है। एसडीएमसी का कहना है कि इस प्रणाली से समय की बचत होगी और निगम प्रभावी तरीके से अधिक राजस्व प्राप्त कर सकेगा। 

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