Wednesday, Sep 18, 2019
delhi university removed the disputed statues of the savarkar bose and bhagat sing

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हटाई विवादित सावरकर, बोस और भगत सिंह की प्रतिमाएं

  • Updated on 8/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) कैम्पस में लगी स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह (Bhagat Singh), विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) और सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) की प्रतिमाओं (Statue) को दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) ने हटा दिया है। इससे पहले कांग्रेस के छात्र संघ NSUI ने भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ दामोदर सावरकर की प्रतिमा लगाए जाने पर विरोध जताया था। इतना ही नहीं NSUI ने सावरकर की प्रतिमा पर कालिख पोतकर जूते-चप्पलों की माला भी पहना दी थी। इन प्रतिमाओं को पूर्व UDSU अध्यक्ष शक्ति सिंह ने मंगलवार को बगैर विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति लिए स्थापित कराया था। 

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दिल्ली विश्वविद्यालय में ABVP द्वारा सावरकर की मूर्ति लगाने पर विवाद बढ़ने लगा है। बीती देर रात NSUI के सदस्यों ने वीर सावरकर की मूर्ति को जूतों की माला पहनाकर उस पर कालिख पोत दी थी। इस दौरान उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक न सुनी। जिसके चलते NSUI कार्यकर्ताओं की सुरक्षकर्मियों से बहस भी हुई। NSUI का मानना है कि शहीद भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ सावरकर की मूर्ति लगाने से देश के शहीदों का अपमान है।

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बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) अध्यक्ष शक्ति सिंह द्वारा मंगलवार सुबह विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस स्थित आर्ट फैकल्टी के मुख्यद्वार के पास वीर सावरकर, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस की मूर्तियां स्थापित कर दी गई थी। 

विश्वविद्यालय प्रशासन से इजाजत नहीं ली

इन मूर्तियों को स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से इजाजत नहीं ली गई थी। इस मुद्दे पर बुधवार को एबीवीपी राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मोनिका चौधरी ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि डूसू द्वारा आट्र्स फैकल्टी के बाहर स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों की स्थापना के संदर्भ में एबीवीपी का स्पष्ट मत है कि डीयू प्रशासन और अन्य संबंधित प्रशासनों की अनुमति से ही मूर्तियां दिल्ली विश्वविद्यालय कैंपस में स्थापित होनी चाहिए। 

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'भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस का अपमान'

वहीं एनएसयूआई ने इसे भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस का अपमान बताया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) का कहना है कि एबीवीपी ने सदैव सावरकर को अपना गुरु माना है। सावरकर की तुलना शहीद भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस से करना शहीदों और उनके स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। AIDSO के दिल्ली राज्य अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने बयान जारी करते हुए कैम्पस में बिना किसी की अनुमति के सावरक के साथ शहीद भगत सिंह और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्तियां स्थापित किए जाने पर कड़े शब्दों में निंदा की है। 

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