Tuesday, Mar 31, 2020
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दर्द का समंदर, आधी-अधूरी लाशें बता रहीं दंगे का मंजर

  • Updated on 2/29/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दंगों के दौरान इंसानियत के दुश्मनों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। इंसान को इंसान नहीं समझा, किसी को बंद कमरे में जला दिया तो किसी को काट डाला। फसाद थमा और लाशों का पोस्टमार्टम हो रहा है। जीटीबी अस्पताल (GTB Hospital) की मोर्चरी के बाहर रोते-बिलखते लोग, रह-रहकर उठती चीखें, बुत से बन गए परिजन अपनों की लाशें देखकर कांप जा रहे हैं। खोजते-खोजते जब लाश के पास पहुंच रहे हैं तो उसे देखकर परिवार वालों का बुरा हाल हो जा रहा है। दंगाइयों की हैवानियत का भयानक मंजर मोर्चरी में पड़ी आधी-अधूरी लाशें बता रही हैं।

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शव के नाम पर किसी की एक टांग मिली है तो किसी की राख के साथ कुछ अवशेष ही मिले हैं। शव तो ऐसे मिले हैं, जिनका पोस्टमार्टम भी नहीं किया जा सकता। यह सब देखकर आत्मा तक कांप जा रही है। लोग अपनों की लाशों को देखकर रोते हुए जो बातें बता रहे हैं, उनको सुनकर दिल दहल जाता है। इस दंगें में लोगों ने अपनों को खो दिया, सपनों का चकनाचूर कर दिया। ताहिरपुर (Tahirpur) स्थित जीटीबी अस्पताल एक तरफ शव पर रोते लोगों का मातम है तो दूसरी तरफ जिन घायल का इलाज चल रहा है, उनकी सलामती के लिए दुआएं हो रही हैं। 

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दंगों ने छीन लिया पिता बेटी गुलशन को मिली बस एक टांग 
लवर सिंह का परिवार आॢथक रूप से लाचार है। उसके पिता किसान पहले ही तेजाबी दुर्घटना में गुलशन के पति नसरूद्दीन ने दोनों आंखें खो दी थीं और चेहरा बुरी तरह जल गया था। बेटी पर आई इस मुसीबत को देखकर मोहम्मद अनवर ने अपने बूढ़े कंधे पर गुलशन के पति और उसके सात और 8 साल के 2 बच्चों की जिम्मेदारी उठा ली। उत्तर प्रदेश के पिलखुआ के मूल निवासी 58 वर्षीय मोहम्मद अनवर कमाने के लिए दिल्ली आ गए।यहां करावल नगर स्थित शिव विहार में एक किराए के मकान में रहते थे। जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए अनवर बकरी पालन और रेहडिय़ों को किराए पर देने का काम करते थे।

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उसकी बेटी गुलशन ने बताया कि अब उसका इस दुनिया में कोई दूसरा सहारा नहीं रहा। गुलशन ने उस 25 फरवरी की मनहूस घड़ी (रात 11 बजे) को याद करते हुए बताया कि उस समय वह अपने पिता से फोन पर बात कर रही थी। तभी अचानक तेज शोरगुल शुरू हो गया। कुछ ही मिनट बाद गुलशन का संपर्क पिता से टूट गया। कई बार मोबाइल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दूसरी ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद गुलशन किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत हो गई।

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कमरे में बंद कर जला दिया था
वीरवार को अनवर के भाई (गुलशन के चाचा) सलीम ने जब यह जानकारी दी कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली (North East Delhi) की हिंसा में उसके पिता की दर्दनाक तरीके से मार डाला गया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सलीम ने गुलाशन को बताया कि जब उसके पिता से उसका संपर्क टूटा, उस दौरान उपद्रवियों ने पहले उन्हें गोली मारी और फिर उनके कमरे को आग के हवाले कर दिया।

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जाते हुए उपद्रवियों ने हैवानियत की सारी सीमाएं तोड़ते हुए जलते हुए मकान में ही अनवर को बंद कर दिया। इस घटना में अनवर पूरी तरह से जल गया, महज एक पैर ही बरामद किया गया है। गुलशन के मुताबिक पुलिस शिनाख्त के लिए डीएनए (DNA) जांच का सहारा लेने की बात कह रही है। गुलशन ने रोते हुए कहा कि एक झटके में उसका परिवार अनाथ हो गया। पिता के जाने के बाद अब बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी। 


 

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